सोने की कीमतों में फिर आया भूचाल: दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड ₹1,56,820 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जानिए 22K और 18K के ताजा भाव; चांदी की चमक पड़ी फीकी
भारतीय सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं के दामों में शनिवार को फिर से तीव्र हलचल देखने को मिली है। वैश्विक कमोडिटी बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और घरेलू स्तर पर मजबूत मांग के चलते सोने के भाव में तेजी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हाजिर बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत उछलकर ₹1,56,820 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ, औद्योगिक मांग में सुस्ती और मुनाफावसूली के कारण चांदी के दामों में नरमी दर्ज की गई है। आगामी शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन से पहले सोने की इस अप्रत्याशित तेजी ने आम खरीदारों और निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती वैश्विक खरीदारी और केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग के कारण घरेलू बाजार में सोने के भाव लगातार नए मनोवैज्ञानिक स्तरों को छू रहे हैं।
24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट में कितना अंतर? जानिए शुद्धता के आधार पर रेट
सोने की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि कैरेट के हिसाब से कीमतों में बड़ा अंतर होता है। 24 कैरेट सोना 99.9 प्रतिशत शुद्ध होता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से सोने की सिल्लियां (Bullion) और सिक्कों के रूप में निवेश के लिए किया जाता है। दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव आज ₹15,682 प्रति ग्राम यानी ₹1,56,820 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।
आम तौर पर आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है, जिसमें 91.6 प्रतिशत शुद्ध सोना और शेष अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं। दिल्ली में आज 22 कैरेट सोने का भाव ₹14,376 प्रति ग्राम यानी ₹1,43,760 प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं, आधुनिक और हल्के आभूषणों में इस्तेमाल होने वाले 18 कैरेट सोने (75 प्रतिशत शुद्धता) की दर आज ₹11,765 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹1,17,650 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। खुदरा बाजार में आभूषण खरीदते समय इन आधार मूल्यों पर 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) और संबंधित ज्वेलर्स का मेकिंग चार्ज अतिरिक्त रूप से देय होता है।
सोने में चमक बरकरार लेकिन चांदी क्यों फिसली? समझिए बाजार की चाल
एक ओर जहां सोना नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं चांदी के खरीदारों को मामूली राहत मिली है। पिछले कारोबारी सत्रों में लगातार तेजी दिखाने के बाद आज चांदी के भाव में हल्की फिसलन देखी गई है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शुद्ध चांदी की दर लगभग ₹2,55,000 प्रति किलोग्राम से फिसलकर ₹2,34,900 से ₹2,39,700 प्रति किलोग्राम के दायरे में कारोबार करती नजर आई।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग का धीमा पड़ना और सट्टेबाजों द्वारा ऊंचे स्तरों पर की गई मुनाफावसूली है। चांदी का 50 प्रतिशत से अधिक उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और ऑटोमोबाइल सेक्टर में होता है। वैश्विक विनिर्माण आंकड़ों में आई नरमी ने चांदी के औद्योगिक उपभोग को थोड़ा प्रभावित किया है। हालांकि, लंबे समय के नजरिए से विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रीन एनर्जी और तकनीकी क्षेत्र में चांदी की अपरिहार्यता इसे दीर्घकाल में मजबूत सहारा प्रदान करेगी।
मुंबई, लखनऊ, जयपुर और पटना समेत प्रमुख शहरों का ताजा रेट कार्ड
देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में स्थानीय परिवहन लागत, चुंगी शुल्क और ज्वैलर्स एसोसिएशन के अलग-अलग मानकों के चलते सोने के खुदरा दामों में मामूली अंतर पाया जाता है। देश के प्रमुख व्यापारिक शहरों का आज का 24 कैरेट और 22 कैरेट का अनुमानित रेट कार्ड इस प्रकार है:
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दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम): 24 कैरेट सोना ₹1,56,820 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,43,760 प्रति 10 ग्राम।
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मुंबई: 24 कैरेट सोना ₹156,770 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹143,700 प्रति 10 ग्राम।
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लखनऊ और कानपुर: 24 कैरेट सोना ₹1,56,920 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,43,850 प्रति 10 ग्राम।
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जयपुर: 24 कैरेट सोना ₹1,56,920 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,43,850 प्रति 10 ग्राम।
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पटना: 24 कैरेट सोना ₹1,56,820 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,43,750 प्रति 10 ग्राम।
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कोलकाता: 24 कैरेट सोना ₹1,56,770 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,43,700 प्रति 10 ग्राम।
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अहमदाबाद: 24 कैरेट सोना ₹1,56,820 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,43,750 प्रति 10 ग्राम।
अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरें: क्यों बढ़ रहे हैं सोने के दाम?
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में आ रहे इस बड़े उछाल के पीछे कई वैश्विक कारक सीधे तौर पर सक्रिय हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) में हाजिर सोना मजबूत रुख के साथ कारोबार कर रहा है। दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं के चलते बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। जब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और ब्याज दरें घटती हैं, तो बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश का आकर्षण बढ़ जाता है।
इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पर बने दबाव और मध्य पूर्व तथा यूरोप में जारी भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) ने भी सोने को मजबूती दी है। संकट के दौर में संस्थागत निवेशक और केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सोने की बड़े पैमाने पर खरीद कर रहे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) समेत चीन और कई उभरते देशों के केंद्रीय बैंकों ने सोने की आक्रामक खरीदारी जारी रखी है, जिससे वैश्विक स्तर पर सोने की आपूर्ति की तुलना में मांग का पलड़ा भारी बना हुआ है।
खरीदारी से पहले रखें इन बातों का ध्यान: हॉलमार्किंग (HUID) और बिलिंग का गणित
यदि आप मौजूदा भाव पर सोने के आभूषण या सिक्के खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों का पालन करना आपके वित्तीय हितों के लिए अत्यंत आवश्यक है:
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बीआईएस हॉलमार्किंग (BIS Hallmark): कभी भी बिना हॉलमार्क वाला सोना न खरीदें। भारतीय मानक ब्यूरो के नियमानुसार अब सोने के हर आभूषण पर 6 अंकों का विशिष्ट अल्फ़ान्यूमेरिक 'HUID' (Hallmark Unique Identification) कोड होना अनिवार्य है। ग्राहक 'BIS CARE' मोबाइल ऐप पर जाकर इस कोड को डालकर आभूषण की शुद्धता, निर्माण की तारीख और प्रमाणित जांच केंद्र की जानकारी स्वयं सत्यापित कर सकते हैं।
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शुद्धता का पैमाना: 24 कैरेट पर 999, 22 कैरेट पर 916 और 18 कैरेट पर 750 का अंक अंकित होता है। बिल बनवाते समय यह सुनिश्चित करें कि आपके आभूषण पर लिखे अंक और बिल पर दर्ज शुद्धता में कोई अंतर न हो।
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मेकिंग चार्ज और जीएसटी: आभूषण की अंतिम कीमत केवल सोने के वजन पर तय नहीं होती। हमेशा जौहरी से स्पष्ट पूछें कि वह प्रति ग्राम कितना मेकिंग चार्ज ले रहा है। मेकिंग चार्ज अलग-अलग डिजाइनों और ब्रांड्स के आधार पर 6% से लेकर 20% तक हो सकता है। इसके अलावा अंतिम बिल राशि पर 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) जोड़ा जाता है।
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पक्का बिल अनिवार्य: हमेशा अधिकृत जीएसटी बिल लें जिसमें सोने का कुल वजन, शुद्धता (कैरेट), मेकिंग चार्ज और हॉलमार्क नंबर साफ-साफ दर्ज हो। भविष्य में आभूषण बदलने या बेचने पर पक्का बिल आपके निवेश का सबसे बड़ा कानूनी प्रमाण होता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह शांत नहीं होतीं और महंगाई के मोर्चे पर ठोस स्थिरता नहीं आती, तब तक सोने की कीमतों में गिरावट की गुंजाइश बेहद सीमित रहेगी। निवेशकों के लिए गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी (SIP मोड) करना एक सुरक्षित रणनीति साबित हो सकती है।