FSSAI का 'MOST IMPORTANT' अलर्ट: नकली मावा, घी और पनीर पर सख्त पहरा, त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा

FSSAI का 'MOST IMPORTANT' अलर्ट: नकली मावा, घी और पनीर पर सख्त पहरा, त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा

दशहरा, करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों की शुरुआत के साथ ही बाजार में दूध, मावा (खोया), पनीर, मिठाइयों और देसी घी की मांग में भारी उछाल देखने को मिलता है। इसी बढ़ी हुई मांग की आड़ में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं और बाजार में डिटर्जेंट, यूरिया, रिफाइंड तेल, स्टार्च और खतरनाक रसायनों से तैयार सिंथेटिक खाद्य उत्पाद उतार देते हैं। आम जनता की सेहत को सीधे तौर पर खतरे में डालने वाली इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 'अत्यंत महत्वपूर्ण' (Most Important) श्रेणी का आधिकारिक अलर्ट जारी किया है। नियामक ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को हाई-अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत डेयरी प्लांटों, थोक मंडियों, कोल्ड स्टोरेज, अंतरराज्यीय परिवहन चेक-पोस्टों और स्थानीय मिठाई दुकानों पर 24 घंटे निगरानी रखने और संदिग्ध नमूनों को तुरंत जब्त करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

सिंथेटिक दूध, मावा और नकली पनीर का जानलेवा नेटवर्क: क्या मिला रहे हैं मुनाफाखोर?

त्योहारों के दौरान देश में प्राकृतिक दूध का उत्पादन सीमित रहता है, लेकिन मावा और पनीर की मांग चार से पांच गुना तक बढ़ जाती है। इस भारी अंतर को पाटने के लिए मिलावटखोर संगठित तरीके से रासायनिक खेल खेलते हैं। जांच रिपोर्टों के अनुसार, नकली मावा तैयार करने के लिए घटिया स्तर के मिल्क पाउडर, आलू, शकरकंद, अरारोट, स्टार्च और बासी ब्रेड का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उसमें चिकनाई लाने के लिए सस्ता पॉम ऑयल या वनस्पति घी मिलाया जाता है। वहीं नकली और सिंथेटिक पनीर बनाने के लिए सिंथेटिक दूध में कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया और हाइड्रोड्रोजन पेरोक्साइड जैसे जहरीले केमिकल घोले जाते हैं। इतना ही नहीं, शुद्ध देसी घी के नाम पर बाजार में जानवरों की चर्बी, पैराफिन वैक्स और आर्टिफिशियल बटर फ्लेवर मिलाकर तैयार किया गया जहरीला मिश्रण बेचा जाता है। ऐसे दूषित और मिलावटी खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन करने से लिवर और किडनी खराब होने, फूड पॉइजनिंग, आंतों में अल्सर और लंबे समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन और अंतरराज्यीय चेक-पोस्टों पर सघन चेकिंग अभियान

FSSAI ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि मिलावट को पकड़ने के लिए केवल पारंपरिक कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर अत्याधुनिक 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' (FSW) यानी मोबाइल लैब वैन को सीधे बाजारों, रेलवे स्टेशनों और हाईवे के टोल प्लाजा पर तैनात किया जाएगा। ये वैन मौके पर ही महज 15 से 20 मिनट के भीतर दूध, खोया और घी में स्टार्च, यूरिया, डिटर्जेंट और कृत्रिम रंगों की प्राथमिक जांच करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रकों और यात्री बसों के जरिए सप्लाई होने वाले मावे और पनीर की खेपों की गहन जांच के लिए पुलिस और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संयुक्त टास्क फोर्स बनाई गई है। बिना वैध खाद्य लाइसेंस (FSSAI License/Registration) के संचालित होने वाली अवैध डेयरियों और गैर-कानूनी विनिर्माण इकाइयों को मौके पर ही सील करने और भारी जुर्माना लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

घर बैठे ऐसे करें असली और नकली मावा, पनीर और देसी घी की पहचान

उपभोक्ताओं को अपनी सतर्कता से मिलावटी सामान से बचने के लिए FSSAI ने कुछ आसान घरेलू जांच विधियां (DART - Detect Adulteration with Rapid Tests) सुझाई हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति अपनी रसोई में कुछ मिनटों में आजमा सकता है:

  • मावा (खोया) में स्टार्च की जांच: बाजार से लाए गए मावे के एक छोटे टुकड़े को पानी में उबालकर ठंडा कर लें। इसके बाद उस पर टिंचर आयोडीन की 2-3 बूंदें डालें। यदि मावे का रंग बदलकर नीला या गहरा जामुनी हो जाता है, तो उसमें मिलावटी स्टार्च या उबला आलू मिला हुआ है। शुद्ध मावे का रंग आयोडीन डालने पर नहीं बदलता। इसके अलावा असली मावे को हथेली पर रगड़ने से घी की खुशबू और हल्की चिकनाई निकलती है, जबकि नकली मावा दानेदार और चिपचिपा महसूस होता है।

  • पनीर की बनावट और आयोडीन टेस्ट: पनीर के एक टुकड़े को पानी में उबालें और ठंडा होने पर उस पर आयोडीन की बूंदें डालें। नीला रंग आना मिलावट का स्पष्ट संकेत है। इसके अलावा असली पनीर बेहद मुलायम होता है और मुंह में रखते ही घुलने जैसा स्वाद देता है, जबकि सिंथेटिक या रबर जैसा पनीर चबाने में सख्त महसूस होता है और खींचने पर रबड़ की तरह खिंचता है।

  • शुद्ध देसी घी का हाइड्रोक्लोरिक एसिड टेस्ट: एक चम्मच पिघले हुए घी में समान मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) और एक चुटकी चीनी मिलाएं। इसे अच्छी तरह हिलाकर 5 मिनट के लिए छोड़ दें। यदि नीचे का हिस्सा गहरा लाल या गुलाबी हो जाता है, तो घी में वनस्पति (डालडा) की मिलावट है। इसके अतिरिक्त, एक चम्मच घी को गर्म पैन में डालें; यदि वह तुरंत पिघलकर गहरा भूरा हो जाए तो वह शुद्ध है, लेकिन यदि पिघलने में समय ले और पीला दिखे तो उसमें मिलावट हो सकती है।

मिलावट साबित होने पर आजीवन कारावास और 10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act) के प्रावधानों के तहत मिलावटी और असुरक्षित (Unsafe) खाद्य सामग्री का निर्माण, भंडारण या बिक्री करना एक गैर-जमानती और गंभीर संज्ञेय अपराध है। FSSAI के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी खाद्य पदार्थ की मिलावट से किसी व्यक्ति की जान को खतरा पैदा होता है या गंभीर बीमारी होती है, तो दोषी व्यापारी या निर्माता के खिलाफ धारा 59 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके तहत दोषी को न्यूनतम 7 साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास (Life Imprisonment) तक की सजा और ₹10 लाख तक के आर्थिक जुर्माने का सख्त कानूनी प्रावधान है। इसके अलावा, बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के फूड लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा।

आम नागरिक यहां दर्ज करा सकते हैं मिलावट की सीधी शिकायत

FSSAI ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध दुकान या मिलावटी उत्पाद की सूचना देने में संकोच न करें। यदि आपको किसी मिठाई की दुकान, डेयरी या किराना स्टोर पर मिलावटी मावा, पनीर या घी बेचे जाने का संदेह है, तो आप सीधे केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पोर्टल 'FoSCoS' (Food Safety Compliance System) पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा FSSAI के राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800112100 पर कॉल करके या 'Food Safety Connect' मोबाइल ऐप के माध्यम से फोटो और बिल अपलोड करके शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। उपभोक्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और स्थानीय खाद्य निरीक्षकों की टीम चौबीस घंटे के भीतर मौके पर पहुंचकर नमूने एकत्र करेगी।