Crude Oil Price Hike: खाड़ी देशों में फिर भड़की जंग! होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद $90 के करीब पहुंचा कच्चा तेल, जानिए भारत पर असर

Crude Oil Price Hike: खाड़ी देशों में फिर भड़की जंग! होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद $90 के करीब पहुंचा कच्चा तेल, जानिए भारत पर असर

मध्य पूर्व (खाड़ी देशों) में एक महीने की शांति के बाद युद्ध की आग एक बार फिर भड़क उठी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रणनीतिक समुद्री मार्ग में अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए ताजा हवाई हमलों और उसके जवाब में तेहरान की ओर से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागी गई मिसाइलों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जबर्दस्त भूचाल आ गया है।

सप्लाई चेन बाधित होने की ताजा आशंकाओं के चलते वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों के दामों में 2% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है।

होर्मुज स्ट्रेट में क्या हुआ? अमेरिकी एयरस्ट्राइक और ईरान का पलटवार

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित ईरान के लारक द्वीप (Larak Island) पर बने दो रॉकेट लॉन्चर्स पर सटीक एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) इन लॉन्चर्स का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों के रास्ते में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने के लिए करने वाले थे। जुलाई के अंत के बाद से ईरान पर यह अमेरिका का पहला बड़ा सीधा सैन्य हमला है।

इस हमले के जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से 8 मिसाइलों को जॉर्डन की सेना ने हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच सीधे टकराव के इस नए दौर ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के ताजा दाम

हमलों की खबर सामने आते ही वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंजों पर कच्चे तेल के वायदा सौदों में तेज उछाल देखा गया:

  • ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 2.11% (लगभग $1.86) की छलांग लगाकर $89.96 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो $90 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने की कगार पर है।

  • डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.92% (लगभग $1.60) बढ़कर $85.00 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह सैन्य टकराव कुछ और दिनों तक जारी रहता है, तो डब्ल्यूटीआई $87.69 के पिछले उच्च स्तर को पार कर $93 प्रति बैरल तक भी जा सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है दुनिया की सबसे संवेदनशील नस?

होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित वह संकरा समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का लगभग 20% यानी पांचवां हिस्सा होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देशों का अधिकांश निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर है।

ताजा हमलों के बाद शिपिंग कंपनियों में डर का माहौल है। सप्ताहांत में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर रोजाना केवल पांच रह गई है। यदि यह चोकपॉइंट लंबे समय के लिए पूरी तरह प्रभावित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारी कमी आ सकती है।

भारत और आम उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी कुल घरेलू कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का भारत पर सीधा बहुआयामी प्रभाव पड़ता है:

  • पेट्रोलियम कंपनियों के मार्जिन पर दबाव: कच्चे तेल के $90 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) का रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन प्रभावित हो सकता है।

  • पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतें: यदि अंतरराष्ट्रीय दरें लंबे समय तक $90 से ऊपर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में संशोधन का दबाव बढ़ सकता है।

  • महंगाई और आयात बिल: महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बढ़ाता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव आता है और माल ढुलाई महंगी होने से आम उपभोक्ता वस्तुओं की महंगाई (Inflation) बढ़ने का जोखिम रहता है।

ऊर्जा बाजार के विश्लेषक अब इस बात पर करीबी नजर रख रहे हैं कि कतर और अन्य मध्यस्थ देश इस तनाव को कम करने में सफल होते हैं या खाड़ी क्षेत्र में यह नया संकट तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल के पार ले जाएगा।