IDBI बैंक सौदे पर कनाडा के व्यापार मंत्री का बड़ा बयान, 107 अरब डॉलर के निवेश के बाद अब भारत में नए एयरपोर्ट्स और हाईवे बनाने का खुला ऑफर
भारत के वित्तीय इतिहास के सबसे बड़े विनिवेश और बैंकिंग सौदों में से एक—आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स द्वारा 60.72% हिस्सेदारी खरीदे जाने को केंद्रीय कैबिनेट (CCEA) की मंजूरी मिलने के तुरंत बाद कनाडा की सरकार का बेहद अहम और सकारात्मक बयान सामने आया है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने द्विपक्षीय निवेश और व्यापारिक साझेदारी पर जोर देते हुए कहा है कि कनाडा पहले ही भारत में लगभग 107 अरब डॉलर (करीब ₹8.9 लाख करोड़) का भारी-भरकम पूंजी निवेश कर चुका है और आईडीबीआई बैंक सौदे की सफलता के बाद भारत में और अधिक पूंजी लगाने की अपार संभावनाएं बन गई हैं। कनाडाई व्यापार मंत्री ने विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि कनाडा की कंपनियां, संस्थागत निवेशक और दिग्गज पेंशन फंड भारत की बढ़ती एविएशन और ट्रांसपोर्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए नए हवाई अड्डे (Airports) और एक्सप्रेसवे/हाईवे नेटवर्क के निर्माण व विस्तार में बड़े पैमाने पर भागीदारी के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
प्रेम वत्स और फेयरफैक्स की सराहना: 'वे भारत में एयरपोर्ट्स बनाने में कर रहे हैं बड़ी मदद'
कनाडाई व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति और 'कनाडा के वॉरेन बफेट' कहे जाने वाले प्रेम वत्स की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "हमारे मन में फेयरफैक्स और प्रेम वत्स के लिए बहुत गहरा सम्मान है कि वे भारत में किस तरह का अभूतपूर्व काम कर रहे हैं। वे भारत में विश्वस्तरीय एयरपोर्ट्स बनाने में मदद कर रहे हैं। जब आप भारत की विशाल बुनियादी ढांचागत (Infrastructure) जरूरतों को देखते हैं, तो ठीक वहीं पर कनाडाई कंपनियां, वैश्विक वित्तीय संस्थान और पेंशन फंड्स सबसे आगे बढ़कर काम कर रहे हैं।" गौरतलब है कि प्रेम वत्स की अगुवाई वाली फेयरफैक्स इंडिया ने देश के सबसे व्यस्त और आधुनिक हवाई अड्डों में शुमार बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (KIA) में बहुलांश हिस्सेदारी खरीदकर उसके विश्वस्तरीय टर्मिनल-2 के विस्तार में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। अब आईडीबीआई बैंक का मालिकाना हक मिलने के बाद यह कनाडाई समूह भारत के वित्तीय और एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों में एक प्रमुख धुरी बनकर उभरा है।
₹52,878 करोड़ की आईडीबीआई डील: बैंकिंग सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा एफडीआई
केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने आईडीबीआई बैंक में सरकार की 30.48% और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24% हिस्सेदारी—कुल मिलाकर 60.72% इक्विटी—कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक इकाई (10955230 Canada Inc.) को बेचने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई है।
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सौदा मूल्य: फेयरफैक्स ने ₹81 प्रति शेयर की दर से बोली लगाई है, जो मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा तय ₹75.99 के फेयर वैल्यू बेंचमार्क से अधिक है। पूरे सौदे का मूल्य ₹52,878 करोड़ (लगभग 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर) बैठता है।
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ऐतिहासिक मील का पत्थर: यह एयर इंडिया की टाटा समूह द्वारा ₹18,000 करोड़ में की गई खरीद के बाद भारत के विनिवेश इतिहास का सबसे बड़ा रणनीतिक सौदा है, साथ ही भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी है।
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सरकार और एलआईसी की मौजूदगी बरकरार: इस विनिवेश के बाद भी बैंक में एलआईसी की लगभग 19% और केंद्र सरकार की करीब 15% हिस्सेदारी बनी रहेगी, जबकि फेयरफैक्स अगले तीन वर्षों तक बैंक का मूल नाम 'IDBI Bank' ही बरकरार रखेगी।
107 अरब डॉलर का निवेश: भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और कनाडाई पेंशन फंड्स का गठबंधन
कनाडाई व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने रेखांकित किया कि भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक (Complementary) हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है जिसे अगले दशक में सड़कों, लॉजिस्टिक्स हब, नवीकरणीय ऊर्जा और हवाई अड्डों के निर्माण के लिए खरबों डॉलर की दीर्घकालिक पूंजी की दरकार है। दूसरी ओर, कनाडा के पास दुनिया के सबसे बड़े, सुरक्षित और परिपक्व पेंशन फंड्स (जैसे CPPIB, CDPQ, OTPP, OMERS) मौजूद हैं, जो लंबी अवधि के रिटर्न के लिए स्थिर और विश्वसनीय बाजारों की तलाश में रहते हैं। सिद्धू ने जोर देकर कहा कि 107 अरब डॉलर के मौजूदा निवेश के बावजूद इसमें आगे और भारी विस्तार की असीम गुंजाइश है। कनाडाई फंड्स पहले से ही भारत के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF), टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स और पावर ग्रिड्स में अरबों डॉलर लगा चुके हैं और अब वे नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के निजीकरण टेंडरों में बोली लगाने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
कूटनीतिक तल्खी के बीच कारोबारी कूटनीति: आर्थिक रिश्तों की मजबूती का संदेश
आईडीबीआई बैंक सौदे को मिली कैबिनेट मंजूरी और कनाडाई व्यापार मंत्री का यह बयान भू-राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान नई दिल्ली और ओटावा के बीच कूटनीतिक तनाव के बावजूद जमीनी व्यापारिक और कॉरपोरेट रिश्तों में कोई ठहराव नहीं आया है। कनाडाई मंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि वैश्विक संस्थागत निवेशक भारत की विकास गाथा (India Growth Story), आर्थिक स्थिरता और नीतिगत सुधारों को राजनीतिक बयानों से कहीं ऊपर रखकर देखते हैं।
भारतीय उड्डयन और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में नए निवेश के द्वार
भारत सरकार की 'उड़ान' (UDAN) योजना और अगले 5 से 10 वर्षों में देश भर में 100 से अधिक नए एयरपोर्ट्स और वाटरड्रोम विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना के बीच कनाडाई एक्सपर्टीज की एंट्री बेहद अहम होगी। कनाडाई इंजीनियरिंग, एविएशन मैनेजमेंट और वित्तीय मॉडल का उपयोग अब टियर-2 और टियर-3 शहरों के आधुनिक एयरपोर्ट टर्मिनलों, एयर कार्गो हब्स और ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स के निर्माण में देखने को मिल सकता है। फेयरफैक्स और आईडीबीआई के इस गठबंधन ने साबित कर दिया है कि भारत का वित्तीय व ढांचागत क्षेत्र विदेशी निवेशकों के लिए दुनिया का सबसे पसंदीदा और सुरक्षित गंतव्य बना हुआ है।