ब्रिक्स बिजनेस फोरम: मोदी का भाषण सुनने आ रहे हैं दुनिया के दिग्गज, जानिए कौन-कौन है शामिल

ब्रिक्स बिजनेस फोरम: मोदी का भाषण सुनने आ रहे हैं दुनिया के दिग्गज, जानिए कौन-कौन है शामिल

ब्रिक्स बिजनेस फोरम का मंच इस समय पूरी दुनिया के व्यापारिक और रणनीतिक जगत के लिए सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को सुनने के लिए दुनिया भर से नामचीन हस्तियों, वैश्विक दिग्गजों और शीर्ष उद्योगपतियों का जमावड़ा लगा हुआ है। भारत की आर्थिक ताकत और प्रधानमंत्री मोदी के विजन को करीब से जानने के लिए वैश्विक स्तर पर गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। इस ऐतिहासिक फोरम में दुनिया के सबसे बड़े बैंकों से लेकर विमान बनाने वाली दुनिया की दिग्गज कंपनियां तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। भारत के व्यापारिक और कूटनीतिक इतिहास में इस आयोजन को एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जहां भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की रूपरेखा तैयार हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के जरिए निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले समय में भारत के साथ व्यापारिक साझेदारियों का स्वरूप क्या होगा और किन क्षेत्रों में सबसे बड़े निवेश के अवसर पैदा होने वाले हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा बैंक और एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी क्यों हैं खास

इस बार के ब्रिक्स बिजनेस फोरम की सबसे बड़ी खासियत इसमें शामिल होने वाले वैश्विक दिग्गज हैं। दुनिया का सबसे बड़ा बैंक और विमान निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक एकाधिकार रखने वाली एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी के शीर्ष अधिकारी इस महामंच पर प्रधानमंत्री मोदी का भाषण सुनने के लिए विशेष रूप से मौजूद हैं। यह उपस्थिति इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भारत अब केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाला प्रमुख चालक बन चुका है। विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों की नजर भारत के तेजी से फैलते विमानन बाजार और एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे पर है। वहीं, दुनिया के सबसे बड़े बैंकों के प्रतिनिधि भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम, बैंकिंग सुधारों और ग्रीन एनर्जी फाइनेंसिंग में निवेश की संभावनाओं को टटोल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से इन वैश्विक संस्थाओं को भारत में अगले दशक की आर्थिक नीतियों का स्पष्ट ब्लूप्रिंट मिलने की पूरी उम्मीद है, जिससे वैश्विक पूंजी का रुख भारत की ओर और तेजी से मुड़ेगा।

ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का नया स्वर्णिम दौर

ब्रिक्स समूह आज के समय में वैश्विक जीडीपी और आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है, ऐसे में इस फोरम का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्राओं में बढ़ावा देने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर इस फोरम में गहन विचार-विमर्श हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में सस्टेनेबल डेवलपमेंट, डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विशेष जोर रहने की संभावना है, जिसे सुनने के लिए ग्लोबल सीईओ बेताब हैं। दुनिया के तमाम बड़े कॉरपोरेट लीडर्स भारत की विकास यात्रा के साथ अपने कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं। इस मंच से निकलने वाले संदेश पूरी दुनिया की शेयर बाजारों और निवेश नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ब्रिक्स देशों के बीच हो रहे ये समझौते पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभुत्व के समानांतर एक नए और संतुलित वैश्विक आर्थिक ढांचे का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें भारत सबसे आगे है।

भारत में निवेश के अपार अवसर और ग्लोबल सीईओ की उम्मीदें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और 'मेक इन इंडिया' से लेकर 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे अभियानों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया है। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में शामिल होने आए दुनिया भर के उद्योगपति यह अच्छी तरह जानते हैं कि आज के दौर में भारत को नजरअंदाज करके कोई भी वैश्विक कंपनी लंबी रेस नहीं जीत सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर निर्माण, रिन्यूएबल एनर्जी और अंतरिक्ष तकनीक जैसे जटिल और हाई-एंड सेक्टर में भारत जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसने दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। प्रधानमंत्री मोदी का भाषण सुनने आए इन विदेशी मेहमानों का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि वे भारत की इस विकास गाथा का हिस्सा कैसे बन सकते हैं। इस फोरम के माध्यम से भारत को कई बड़े विदेशी निवेश प्रस्ताव मिलने की प्रबल संभावना है, जिससे देश के भीतर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक दक्षिण की आवाज और भविष्य की आर्थिक रणनीति

ब्रिक्स बिजनेस फोरम केवल बड़े कारोबारियों के मिलने की जगह भर नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की सामूहिक ताकत का अहसास कराने वाला मंच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा से विकासशील देशों के हितों को वैश्विक मंचों पर मजबूती से रखा है और उनकी आवाज को बुलंद किया है। दुनिया का सबसे बड़ा बैंक और विमान निर्माता कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों का इस मंच पर मौजूद होना यह साबित करता है कि अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र पश्चिम से बदलकर एशिया और विशेषकर भारत की ओर शिफ्ट हो रहा है। मोदी का भाषण सुनने के लिए उमड़ी यह भारी भीड़ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दुनिया का भविष्य भारत की नीतियों और बाजार के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। इस सम्मेलन के दौरान होने वाली द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों से दुनिया के कई देशों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते नई ऊंचाइयों को छूने वाले हैं, जिसका दूरगामी सकारात्मक प्रभाव आने वाले वर्षों में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।