गाजा में अटकी सांसें, इजरायल को बंधकों का इंतजार ,भारत शांति दूत बन पहुंचा मिस्र

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News India Live, Digital Desk: अभी हाल ही में, जब इजरायल बंधकों की वापसी का इंतजार कर रहा है और गाजा में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, भारत ने एक बेहद अहम कदम उठाया है. हमारे देश ने मिस्र के शर्म अल-शेख में होने वाले 'शिखर शांति सम्मेलन' में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. यह सम्मेलन उस मुश्किल घड़ी में शांति का रास्ता तलाशने के लिए आयोजित किया जा रहा है, जब मध्य-पूर्व में तनाव बहुत बढ़ गया है.

इस वक्त इजरायल और हमास के बीच चल रहा संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है. एक तरफ इजरायल पर 7 अक्टूबर को हुए हमलों के बाद हमास के कब्जे में कई बंधक हैं, जिनके सुरक्षित वापसी का पूरा देश बेसब्री से इंतजार कर रहा है. दूसरी तरफ, गाजा में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं. वहाँ बिजली, पानी, ईंधन और दवाओं जैसी जरूरी चीजों की भारी कमी है, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है. इस पूरे इलाके में मानवीय संकट मंडरा रहा है.

ऐसे समय में मिस्र की पहल पर यह शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया है. इसका मुख्य मकसद इस गंभीर स्थिति को सुलझाना, हिंसा को रोकना और गाजा के लोगों तक मानवीय सहायता पहुँचाने के रास्ते खोलना है. यह दुनिया के कई देशों के लिए एक साथ आकर इस संकट पर बात करने और एक स्थायी समाधान खोजने का मौका है.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस अहम शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मिस्र पहुंचे हैं. भारत हमेशा से वैश्विक शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है और इस सम्मेलन में उसकी भागीदारी इस बात को दिखाती है कि वह मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों में अपना सहयोग देना चाहता है. यह भारतीय विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण क्षण है, जहाँ भारत वैश्विक स्तर पर अपनी आवाज उठा रहा है और कूटनीतिक तरीकों से इस गंभीर मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहा है. सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह सम्मेलन इस तनावपूर्ण माहौल में शांति और उम्मीद की कितनी रोशनी ला पाता है.