Bollywood Flashback : सिर्फ एक फिल्म ने बना दिया स्टार, जानिए रंगीला के पीछे अहमद खान की संघर्ष और सफलता की कहानी

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News India Live, Digital Desk : अगर आप 90 के दशक के बच्चे (90s kids) हैं, तो आपने फिल्म 'रंगीला' (Rangeela) जरूर देखी होगी। उर्मिला मातोंडकर का वो बेफिक्र डांस और "यायी रे, यायी रे" वाला गाना आज भी हमारे पैरों को थिरकने पर मजबूर कर देता है। लेकिन क्या आपको पता है कि इन शानदार डांस स्टेप्स के पीछे जिस इंसान का दिमाग था, वो उस वक्त खुद एक बच्चा ही था?

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मशहूर कोरियोग्राफर और डायरेक्टर अहमद खान (Ahmed Khan) की। हाल ही में उन्होंने अपनी ज़िंदगी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। बात उस ज़माने की है जब अहमद खान अपना करियर शुरू ही कर रहे थे।

पहला चेक और 1 लाख रुपये!

सोचिए, आज से करीब 29 साल पहले यानी 1995 में 1 लाख रुपये की कीमत क्या रही होगी? शायद आज के 10-20 लाख के बराबर! अहमद खान ने बताया कि जब उन्होंने 'रंगीला' फिल्म के गानों को कोरियोग्राफ किया, तो उन्हें फीस के तौर पर 1 लाख रुपये का चेक मिला था।

अहमद बताते हैं, "मैं उस समय बहुत छोटा था। जब मुझे वो चेक मिला, तो मुझे अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ। मेरे लिए वह रकम बहुत बड़ी थी। उस वक्त एक लाख रुपये मायने रखते थे।"

नहीं था अपना बैंक अकाउंट

इस किस्से का सबसे मजेदार और मासूम पहलू यह है कि इतनी बड़ी रकम हाथ में आने के बाद अहमद खान को समझ ही नहीं आया कि इसका करें क्या? वजह यह थी कि उस वक्त उनके पास खुद का बैंक अकाउंट ही नहीं था। आखिर इतनी कम उम्र में अकाउंट की जरूरत किसे पड़ती थी!

फिर उन्होंने क्या किया? वो खुशी-खुशी घर गए और वो चेक अपनी मां के हाथों में रख दिया। अपनी मेहनत की पहली इतनी बड़ी कमाई को परिवार के साथ बांटने की खुशी अलग ही होती है।

राम गोपाल वर्मा का भरोसा

अहमद खान आज इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम हैं, लेकिन उन्हें पहला बड़ा ब्रेक देने वाले कोई और नहीं बल्कि राम गोपाल वर्मा थे। आरजीवी (RGV) ने अहमद के टैलेंट को पहचाना और इतनी बड़ी फिल्म की जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी। नतीजा हम सबके सामने है— 'रंगीला' ने बॉलीवुड में डांस की परिभाषा ही बदल दी थी। उर्मिला के स्टेप्स और ए आर रहमान का संगीत, सब कुछ जादू जैसा था।

कड़ी मेहनत का फल

दोस्तों, अहमद खान की यह कहानी हमें सिखाती है कि टैलेंट की कोई उम्र नहीं होती। 19-20 साल की उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाना और इतिहास रच देना कोई छोटी बात नहीं है। आज 51 साल की उम्र में जब अहमद पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वो 1 लाख का चेक सिर्फ़ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी मेहनत का पहला मेडल नजर आता है।

तो अगली बार जब 'रंगीला रे' गाना सुनें, तो याद रखियेगा कि इसके पीछे एक यंग लड़के के सपनो की उड़ान थी!