BJP New District Units : लखनऊ में भाजपा की बड़ी बैठक, पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह ने तैयार की नई सूची
News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश भाजपा ने राज्य के 98 संगठनात्मक जिलों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 'मिशन 2027' की तैयारी शुरू कर दी है। लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में संघ और पार्टी के बीच समन्वय और नए जिला अध्यक्षों के चयन पर मुहर लग गई है। इस बार सूची में जातीय संतुलन (Caste Balance) और युवा चेहरों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
1. लखनऊ बैठक के मुख्य बिंदु (The Strategic Meet)
दिग्गजों की मौजूदगी: बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और आरएसएस के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार मौजूद रहे।
फीडबैक आधारित चयन: जिलाध्यक्षों के चयन के लिए पार्टी ने प्रत्येक जिले से 3-3 संभावित उम्मीदवारों का पैनल मांगा था। यह पैनल क्षेत्रीय अध्यक्षों और जिला चुनाव अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है।
सोशल इंजीनियरिंग: भाजपा इस बार 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का जवाब देने के लिए पिछड़ी जातियों (OBC) और दलितों को संगठन में 50% से अधिक हिस्सेदारी देने की योजना बना रही है।
2. नई सूची की संभावित खासियतें
परफॉर्मेंस आधारित रिटेंशन: सूत्रों के अनुसार, जिन जिलाध्यक्षों का प्रदर्शन पिछले चुनावों में अच्छा रहा है, उनमें से लगभग 25-30% को दोबारा मौका दिया जा सकता है।
नए चेहरों की एंट्री: खराब प्रदर्शन वाले जिलों और विवादों में घिरे अध्यक्षों की छुट्टी तय मानी जा रही है। उनकी जगह ऊर्जावान और संघ पृष्ठभूमि वाले कार्यकर्ताओं को तरजीह मिलेगी।
महिला भागीदारी: इस बार प्रत्येक संभाग में कम से कम एक महिला जिलाध्यक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
3. कब होगी आधिकारिक घोषणा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, सूची को अंतिम अनुमोदन (Final Approval) के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व के पास भेज दिया गया है।
संभावित तारीख: मार्च के अंतिम सप्ताह तक पहले चरण में 50 से अधिक जिलों के अध्यक्षों के नाम घोषित किए जा सकते हैं।
मंडल अध्यक्षों की सूची: जिलों के साथ-साथ मंडल अध्यक्षों (Mandal Adhyaksh) के स्तर पर भी बड़े बदलावों की तैयारी है।
4. राजनीतिक मायने: 2027 की तैयारी
असम की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी भाजपा 'कैडर' और 'अनुशासन' पर जोर दे रही है। यह पुनर्गठन केवल पदों का बंटवारा नहीं है, बल्कि विपक्षी एकता के खिलाफ एक जमीनी दीवार खड़ी करने की कोशिश है।