उत्तर बिहार में मानसून की तूफानी वापसी: अगले 3 दिन मूसलाधार बारिश का अलर्ट, IMD पटना ने जारी की चेतावनी
बिहार के मौसम में एक बार फिर बड़ा और व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना (IMD Patna) और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य भर में अगले 72 घंटों (अगले 3 दिनों) के लिए मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात/ठनका) की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर बिहार से होकर गुजर रही सक्रिय मानसूनी ट्रफ लाइन के चलते वातावरण में नमी का भारी जमावड़ा हुआ है। इसके साथ ही नेपाल की तराई और पूर्वी हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली नमी युक्त ठंडी हवाओं का बिहार के मैदानी इलाकों में टकराव हो रहा है, जिससे घने क्यूम्युलोनिम्बस बादलों का निर्माण हुआ है। इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से 6 सितंबर से 8 सितंबर 2026 के दौरान उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि आज विशेष रूप से उत्तर बिहार के जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं (Gusty Winds) चलेंगी और आकाशीय बिजली गिरने का सबसे अधिक खतरा बना रहेगा।
उत्तर बिहार के इन जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट: चंपारण से पूर्णिया तक तेज आंधी और झमाझम बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र पटना द्वारा जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, उत्तर बिहार के तराई और सीमावर्ती जनपदों में बारिश और आंधी का सबसे प्रचंड रूप देखने को मिलेगा। विभाग ने पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सीवान और सारण (छपरा) जिलों के लिए बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर बादलों की भयंकर गर्जना के साथ 115 मिमी से अधिक की अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। वहीं सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया और कटिहार जनपदों में मध्यम से भारी दर्जे की वर्षा का 'येलो अलर्ट' प्रभावी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन इलाकों में गरज-चमक के साथ अचानक चलने वाली 50 किमी प्रति घंटे तक की तूफानी हवाएं कच्चे मकानों, टीन शेड, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लगातार बारिश के चलते सीमांचल और मिथिलांचल के कई निचले शहरी व ग्रामीण इलाकों में जलभराव की स्थिति विकराल हो सकती है।
आकाशीय बिजली (ठनका) का जानलेवा साया: किसानों और ग्रामीणों के लिए विशेष रेड वार्निंग
बिहार में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली (वज्रपात/ठनका) सबसे जानलेवा प्राकृतिक आपदा साबित होती रही है। मौसम विभाग ने आज उत्तर बिहार के किसानों और खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। वायुमंडल में नमी का स्तर 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच जाने और दोपहर के समय तापमान में मामूली वृद्धि होने से स्थानीय स्तर पर अत्यधिक भारी गरज वाले बादलों का निर्माण हो रहा है, जो चंद मिनटों में भीषण वज्रपात का कारण बनते हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर चेतावनी प्रसारित कराएं। किसानों से साफ कहा गया है कि जब तक आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट शांत न हो, तब तक वे धान के खेतों में पानी निकालने, मवेशी चराने या कृषि कार्यों के लिए बाहर न निकलें। आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि वज्रपात के समय किसी भी हाल में अकेले खड़े बड़े पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे शरण न लें, क्योंकि सबसे ज्यादा मौतें पेड़ों के नीचे खड़े होने के कारण ही दर्ज की जाती हैं।
उफान पर कोसी, गंडक और बागमती: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश से बाढ़ का खतरा गहराया
उत्तर बिहार के लिए यह बारिश केवल जलभराव ही नहीं, बल्कि बाढ़ का दोहरा संकट लेकर आई है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों और जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते बिहार की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान, अधवारा समूह और महानंदा नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के करीब या उसके पार बह रही हैं। वाल्मीकिनगर बराज और कोसी बराज (बीरपुर) से लाखों क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सुपौल, सहरसा और खगड़िया के तटीय इलाकों और दियारा क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। जल संसाधन विभाग ने सभी तटबंधों पर 24 घंटे पेट्रोलिंग और सतत निगरानी के आदेश दिए हैं। बाढ़ नियंत्रण प्रभाग के इंजीनियरों को संवेदनशील बांधों पर फ्लड फाइटिंग सामग्री (बालू की बोरियां, बोल्डर) तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
दक्षिण बिहार और राजधानी पटना का हाल: गंगा के जलस्तर पर नजर, उमस से मिलेगी राहत
उत्तर बिहार में जहां आंधी और भारी बारिश का तांडव रहेगा, वहीं दक्षिण बिहार के जिलों—राजधानी पटना, गया, नालंदा, नवादा, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर, मुंगेर, जमुई और बांका में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। राजधानी पटना में आज दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और दोपहर से शाम के बीच तेज गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश के कई स्पेल देखने को मिल सकते हैं। बारिश के चलते पटना में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जाएगा, जिससे पिछले कई दिनों से पड़ रही चिपचिपी उमस भरी गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, बक्सर से लेकर पटना, मोकामा और भागलपुर तक गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंगा के तटीय घाटों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लोगों को गहरे पानी में स्नान करने से रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम केंद्र की सुरक्षा एडवाइजरी: क्या करें और क्या न करें?
आगामी 3 दिनों के खराब मौसम को देखते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:
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दामिनी ऐप का उपयोग करें: ग्रामीण और शहरी नागरिक अपने मोबाइल फोन में भारत सरकार का 'दामिनी' (DAMINI) ऐप या 'मौसम' ऐप डाउनलोड करें, जो आपके इलाके में आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले ऑडियो और टेक्स्ट चेतावनी देता है।
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पक्के मकान में ही शरण लें: तेज मेघगर्जन के समय यदि आप सड़क या खेत में हैं, तो तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर में चले जाएं। टिन शेड, कच्ची झोपड़ी या लोहे की रेलिंग से दूर रहें।
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इलेक्ट्रिक गैजेट्स से दूरी: घर के भीतर रहने पर भी बिजली के भारी उपकरणों (टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज) के स्विच बंद कर दें। तार वाले टेलीफोन या चार्जिंग पर लगे मोबाइल का उपयोग बिल्कुल न करें।
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सड़क यात्रा में सावधानी: भारी बारिश के कारण दृश्यता कम होने और सड़कों पर जलभराव के चलते गड्ढे न दिखने का जोखिम रहता है। दोपहिया वाहन चालक धीमी गति से चलें और उफनते कॉजवे या पुलियों को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें।
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किसानों के लिए जरूरी सलाह: आगामी 72 घंटों तक खेतों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव न करें। फसलों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था सुचारु रखें ताकि पानी जमा न हो पाए।