निर्दलीय MLC राहुल राज के मुद्दे पर जेडीयू ने खोला बीजेपी के खिलाफ मोर्चा

निर्दलीय MLC राहुल राज के मुद्दे पर जेडीयू ने खोला बीजेपी के खिलाफ मोर्चा

बिहार की राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के परिणामों के बाद से ही सत्ताधारी राष्ट्रीय जनता दल (एनडीए) के भीतर भीतरखाने सुलग रहा असंतोष अब खुलकर सतह पर आ गया है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बागी तेवर अपनाकर निर्दलीय चुनाव जीतने वाले और जेडीयू प्रत्याशी को पटखनी देने वाले डॉ. राहुल राज के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने तीखा रुख अख्तियार कर लिया है। जेडीयू के नेताओं ने इसे गठबंधन धर्म के खिलाफ करार देते हुए सीधा मोर्चा खोल दिया है, जिससे एनडीए के दोनों प्रमुख दलों के बीच सियासी घमासान मच गया है।

सारण सीट पर जेडीयू की हार और राहुल राज की बीजेपी में एंट्री से उपजा विवाद

बिहार विधान परिषद चुनावों के दौरान सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए गठबंधन के तहत यह सीट जेडीयू के कोटे में आई थी, जहां से पार्टी ने आनंद पुष्कर को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं, पहले से तैयारी कर रहे स्थानीय नेता और पूर्व बीजेपी पदाधिकारी डॉ. राहुल राज टिकट कटने से नाराज होकर निर्दलीय ही मैदान में उतर गए। त्रिकोणीय और कड़े मुकाबले में राहुल राज ने शानदार जीत हासिल करते हुए जेडीयू उम्मीदवार को शिकस्त दी। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद राहुल राज ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा नेताओं से मुलाकात कर पार्टी में वापसी कर ली। बागी तेवर दिखाने वाले और पार्टी उम्मीदवार को हराने वाले नेता को तुरंत बीजेपी द्वारा गले लगाए जाने से जेडीयू खेमे में भारी नाराजगी है।

जेडीयू का कड़ा एतराज़: गठबंधन धर्म और अनुशासनहीनता पर उठाए बड़े सवाल

जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने इस घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई है। जेडीयू का तर्क है कि जब एनडीए गठबंधन के तहत सीट का बंटवारा हो चुका था और पार्टी ने आधिकारिक उम्मीदवार उतारा था, तो ऐसे में बागी उम्मीदवार को चुनाव हराने के बावजूद पार्टी में शामिल करना गठबंधन की प्राथमिक मर्यादाओं और नियमों के विपरीत है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि इस तरह के कदम से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है और सहयोगियों के बीच आपसी विश्वास को ठेस पहुंचती है। पार्टी के अंदरखाने यह चर्चा जोरों पर है कि यदि एनडीए के भीतर इस प्रकार की खींचतान जारी रही, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

राहुल राज का पलटवार: 'मैंने एनडीए को नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट विचारधारा को हराया'

दूसरी ओर, इन तमाम राजनीतिक विरोधों और जेडीयू के मोर्चे पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्दलीय से बीजेपी में लौटे एमएलसी राहुल राज ने अपने ऊपर लग रहे तमाम आरोपों का बेबाक जवाब दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल राज ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने किसी भी एनडीए गठबंधन या उसके सहयोगी दल को नहीं हराया है, बल्कि उन्होंने उस विचारधारा को शिकस्त दी है जो हाल ही में पाला बदलकर मैदान में उतरी थी। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले वामपंथी पृष्ठभूमि से आकर जेडीयू का टिकट पाने वाले उम्मीदवार को स्थानीय कार्यकर्ता और शिक्षक कभी स्वीकार नहीं कर सकते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे हमेशा से पार्टी के अनुशासित सिपाही रहे हैं और शिक्षकों के हक के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

एनडीए की अंदरूनी कलह पर विपक्ष की पैनी नजर, सियासी तापमान चरम पर

बिहार एनडीए के दो सबसे बड़े स्तंभों—बीजेपी और जेडीयू—के बीच एमएलसी चुनाव के बाद शुरू हुई इस बयानबाजी और तनातनी ने विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का एक और बड़ा मौका दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ऊपरी तौर पर दोनों दल साथ मिलकर सरकार चला रहे हों, लेकिन स्थानीय निकायों और विधान परिषद चुनावों में सीटों के बंटवारे और भितरघात के जो जख्म सामने आए हैं, वे आसानी से भरने वाले नहीं हैं। फिलहाल, दिल्ली से लेकर पटना तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या बीजेपी और जेडीयू का यह शीर्ष नेतृत्व इस आंतरिक कलह को समय रहते संभाल पाएगा या यह घमासान आने वाले दिनों में और विकराल रूप लेगा।