जदयू के अभिषेक झा पर भड़के BJP विधायक सुनील पिंटू

जदयू के अभिषेक झा पर भड़के BJP विधायक सुनील पिंटू

बिहार की राजनीति और सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के कुनबे में एक बार फिर अंदरूनी बयानबाजी का नया दौर शुरू हो गया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Tirhut Graduate Constituency) से विधान परिषद (MLC) का उप-चुनाव हारने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक झा की ओर से आए 'चक्रव्यूह और अभिमन्यु' वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद-विधायक सुनील पिंटू ने अभिषेक झा के आरोपों का आक्रामक जवाब देते हुए कहा कि एनडीए के भीतर किसी ने कोई चक्रव्यूह नहीं रचा था। सुनील पिंटू ने दो टूक शब्दों में कहा कि अभिषेक झा कोई 'अभिमन्यु' नहीं हैं, बल्कि वे अपनी ही प्रशासनिक और तकनीकी गलतियों की वजह से चुनाव हारे हैं। इस जुबानी जंग के बाद बिहार एनडीए के भीतर राजनीतिक गलियारों में खींचतान और बयानबाजी का पारा चढ़ गया है।

'अभिमन्यु' वाले फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ एनडीए के भीतर घमासान

पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब तिरहुत स्नातक सीट से जदयू समर्थित प्रत्याशी अभिषेक झा को निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी के हाथों 9,147 मतों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम आने के बाद अभिषेक झा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि "क्या वे अपने ही राजनीतिक परिवार (NDA) के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेले तो नहीं पड़ गए थे?" इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि उनके पक्ष में पड़े लगभग 4,700 मतों को सिर्फ इसलिए रद्द (Invalid) कर दिया गया क्योंकि मतपत्र पर नाम के आगे 1 लिखने के बजाय 'सही' (✓) का निशान लगा दिया गया था। अभिषेक झा के इस सीधे इशारे ने एनडीए के सहयोगियों विशेषकर बीजेपी के भीतर भारी नाराजगी पैदा कर दी।

सुनील पिंटू का तीखा प्रहार: 'स्नातक मतदाता ऐसी गलती नहीं करते'

अभिषेक झा के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी नेता सुनील पिंटू ने प्रेस के सामने आकर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि अपनी हार का ठीकरा गठबंधन या सहयोगियों पर फोड़ना पूरी तरह से गलत है।

  • तकनीकी चूक और मतदाता जागरूकता: सुनील पिंटू ने कहा कि तिरहुत स्नातक चुनाव में मतदाता पढ़े-लिखे स्नातक होते हैं। चुनाव प्रक्रिया में वरीयता क्रम दर्शाने के लिए 1, 2, 3 लिखा जाता है। यदि किसी प्रत्याशी के समर्थकों ने टिक (✓) का निशान लगाया और 4,700 वोट रद्द हुए, तो यह प्रत्याशी और उनके चुनाव एजेंटों की वोटिंग ट्रेनिंग की विफलता है, न कि किसी सहयोगी दल का षड्यंत्र।

  • गठबंधन धर्म और निष्ठा: बीजेपी विधायक ने स्पष्ट किया कि एनडीए के सभी कार्यकर्ताओं ने चुनाव में पूरी निष्ठा के साथ काम किया था। हार के बाद खुद को महाभारत का 'अभिमन्यु' बताकर सहानुभूति बटोरने और अपने ही साथियों पर सवाल खड़े करने का प्रयास राजनीतिक परिपक्वता की कमी को दर्शाता है।

तिरहुत स्नातक सीट का चुनावी समीकरण और हार के मायने

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पिछले कुछ समय से बिहार की प्रतिष्ठित एमएलसी सीटों में से एक रहा है। पूर्व में देवेश चंद्र ठाकुर इस सीट का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन उनके सांसद चुने जाने के बाद यहां उप-चुनाव की स्थिति बनी थी। जदयू ने अपने युवा प्रवक्ता अभिषेक झा पर दांव खेला था, लेकिन लगातार दूसरी बार निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर ब्रजवासी ने भारी मतों से विजय हासिल कर अपना कब्जा बरकरार रखा।

इस चुनावी नतीजे के तुरंत बाद विजयी निर्दलीय एमएलसी की बीजेपी के शीर्ष नेताओं और प्रदेश नेतृत्व से मुलाकात ने भी चर्चाओं को गर्म कर दिया है। जदयू खेमे में इस बात को लेकर निराशा है कि चुनाव के दौरान जमीनी स्तर पर एनडीए का कैडर पूरी तरह एकजुट होकर वोट ट्रांसफर नहीं करा पाया।

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के लिए वेक-अप कॉल

अभिषेक झा और सुनील पिंटू के बीच का यह ताजा विवाद केवल एक एमएलसी सीट की हार तक सीमित नहीं है। बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों (भाजपा और जदयू) के नेताओं का इस तरह सार्वजनिक मंचों पर आमने-सामने आना गठबंधन के भीतर समन्वय (Coordination) की कमी की ओर इशारा करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इस तरह की बयानबाजी और अंदरूनी मतभेदों पर काबू नहीं पाया, तो आने वाले बड़े चुनावी मुकाबलों में एनडीए के लिए यह गुटबाजी भारी पड़ सकती है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।