Bihar Women Ministers : बंदूक थामने वाले हाथों में अब बिहार की कमान गोल्डन गर्ल श्रेयसी सिंह बनीं मंत्री
News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति में आज का दिन वाकई खास है। क्या आपने वो खबर सुनी जिसने आज पटना से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उस 'गोल्डन गर्ल' की जिसने कभी शूटिंग रेंज में अपनी बंदूक से सटीक निशाना लगाकर भारत का झंडा लहराया था, और आज वही बेटी बिहार के भविष्य को संवारने के लिए मंत्री की कुर्सी पर बैठ गई है। नाम है श्रेयसी सिंह (Shreyasi Singh)।
अक्सर हम फिल्मों में देखते हैं कि कैसे एक खिलाड़ी संघर्ष करता है और फिर जीतता है, लेकिन श्रेयसी की कहानी रील लाइफ से नहीं, रियल लाइफ से जुड़ी है। और यकीन मानिए, यह कहानी किसी सुपरहिट फिल्म से कम नहीं है।
जमुई में खिल गया 'कमल', 54 हजार से जीत
इस बार 2025 के चुनावों में सबकी निगाहें जमुई सीट पर टिकी थीं। मुकाबला आसान नहीं था, सामने आरजेडी (RJD) के मोहम्मद शमशाद आलम थे। लेकिन जब नतीजे आए, तो सब दंग रह गए! श्रेयसी सिंह ने सिर्फ जीत दर्ज नहीं की, बल्कि विरोधियों को 54,000 वोटों के विशाल अंतर से पछाड़ा। यह कोई साधारण जीत नहीं है; यह बताती है कि जमुई की जनता ने अपनी इस बेटी को किस कदर सिर-आंखों पर बिठाया है।
अब इस शानदार जीत का इनाम भी शानदार मिला है—नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में उन्हें मंत्री (Bihar Cabinet Minister) की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निशानेबाज से 'माननीय' तक का सफर
जरा सोचिए, कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में सोने का तमगा जीतने वाली एक युवा एथलीट, जब खादी पहनकर राजनीति के अखाड़े में उतरती है तो क्या होता है? वही हुआ जिसकी उम्मीद थी—एक नई ऊर्जा, एक नई सोच!
लेकिन यह सफर आसान नहीं था। श्रेयसी बिहार के दिग्गज नेता रहे दिवंगत दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की बेटी हैं। लोग कहते हैं कि विरासत आसानी से मिल जाती है, पर उसे संभालना सबसे मुश्किल होता है। पिता के जाने के बाद श्रेयसी के पास दो रास्ते थे—या तो अपने खेल की दुनिया में मस्त रहें या पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए धूल-भरी सियासत में कदम रखें। उन्होंने मुश्किल रास्ता चुना और आज देखिए, नतीजा सबके सामने है।
खेल वाली 'Spirit' अब सरकार में
बिहार की राजनीति में अक्सर बाहुबल और पुराने चेहरों की बात होती है, लेकिन श्रेयसी सिंह का मंत्री बनना ताजी हवा के झोंके जैसा है।
- युवा जोश: वो युवा हैं, पढ़ी-लिखी हैं और दुनिया देख चुकी हैं। बिहार के युवाओं को उनसे बहुत उम्मीदें हैं।
- महिला सशक्तिकरण: वो बिहार की उन लाखों बेटियों के लिए मिसाल हैं जो सोचती हैं कि राजनीति उनके लिए नहीं है। श्रेयसी ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे पक्के हों, तो एक महिला गोल्ड मेडल भी ला सकती है और मंत्रालय भी चला सकती है।
- काम का जुनून: एक खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता। शूटिंग में जैसे एकाग्रता (Focus) चाहिए होती है, वैसी ही पैनी नजर अब मंत्रालय के कामकाज पर भी रहेगी।
आगे की राह...
अब जब शपथ ले ली गई है और जीत का जश्न मन गया है, तो असली 'खेल' अब शुरू होगा। लोग अब श्रेयसी को शूटिंग रेंज वाले अवतार में नहीं, बल्कि विकास करने वाले मंत्री के रूप में देखेंगे। उम्मीद है कि जिस तरह उन्होंने देश के लिए 'गोल्ड' जीता, वैसे ही अपने काम से बिहार को भी 'गोल्डन' बनाएंगी।