Bihar UPSC Result : ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह ने बोला झूठ? गाजीपुर की छात्रा का भी 301वीं रैंक पर दावा
News India Live, Digital Desk: बिहार के चर्चित चेहरा रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह (भोजपुर) की यूपीएससी में 301वीं रैंक आने की खबर शुक्रवार से सुर्खियों में थी। लेकिन अब यह मामला पूरी तरह उलझ गया है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली एक अन्य छात्रा आकांक्षा सिंह ने भी उसी रोल नंबर और उसी रैंक पर अपना दावा पेश किया है। इस टकराव ने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों तक सनसनी फैला दी है।
क्या है पूरा विवाद? (The Conflict)
यूपीएससी 2024 के परिणाम जारी होने के बाद भोजपुर की आकांक्षा सिंह के घर पर बधाइयों का तांता लग गया। दावा किया गया कि उन्होंने 301वीं रैंक हासिल की है। लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने अपने दस्तावेज सार्वजनिक किए:
समान रोल नंबर: दोनों छात्राओं का दावा है कि रोल नंबर 0850021 उनका है।
यूपीएससी लिस्ट का सच: यूपीएससी की आधिकारिक पीडीएफ लिस्ट में 301वें स्थान पर 'आकांक्षा सिंह' का नाम दर्ज है।
मार्कशीट का खेल: गाजीपुर की आकांक्षा ने अपनी ओरिजिनल मार्कशीट और एडमिट कार्ड दिखाते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली में रहकर तैयारी की थी और यह सफलता उनकी है। दूसरी ओर, भोजपुर की आकांक्षा के पास फिलहाल ठोस सबूतों की कमी बताई जा रही है।
जांच के घेरे में भोजपुर की आकांक्षा?
लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, भोजपुर की आकांक्षा सिंह पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि:
साक्ष्य का अभाव: जब उनसे आधिकारिक एडमिट कार्ड या लॉगिन क्रेडेंशियल मांगे गए, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं।
ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम: बड़े नाम से जुड़े होने के कारण इस खबर ने तेजी से तूल पकड़ा, जिससे अब परिवार की भी किरकिरी हो रही है।
गाजीपुर का पक्ष: गाजीपुर की छात्रा ने साक्ष्यों के साथ स्पष्ट किया है कि इंटरव्यू और मेन्स की परीक्षाओं में वही शामिल हुई थीं।
यूपीएससी में 'दो नाम' का कंफ्यूजन या धोखाधड़ी?
यह पहली बार नहीं है जब यूपीएससी रिजल्ट में एक ही रैंक पर दो दावेदार सामने आए हों। इससे पहले भी आएशा मकरानी और आएशा फातिमा जैसे मामलों में ऐसा देखा गया था, जहाँ एक ही रोल नंबर पर दो लोग दावा कर रहे थे।
कार्रवाई: अगर यह साबित होता है कि किसी ने फर्जी तरीके से रिजल्ट का दावा किया है, तो यूपीएससी उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा सकता है और पुलिस जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर सकती है