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March 13 2026 02:51 am

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: अब 6 घंटे का सफर सिर्फ 2.5 घंटे में! जानें कार का टोल, रूट और कब से शुरू होगी सीधी एंट्री

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नई दिल्ली/देहरादून: दिल्ली और उत्तराखंड के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए खुशियों की घड़ी नजदीक आ गई है। बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (Delhi-Dehradun Expressway) का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और वर्तमान में इसका ट्रायल रन (Trial Run) चल रहा है। 12 मार्च 2026 की ताजा अपडेट के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के औपचारिक उद्घाटन की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिससे दिल्ली से देहरादून की दूरी सिमटकर महज ढाई से तीन घंटे रह जाएगी।

सफर में 3 घंटे की बचत: नया vs पुराना रूट

वर्तमान में दिल्ली से देहरादून जाने के लिए मेरठ-मुजफ्फरनगर वाले पुराने मार्ग का सहारा लेना पड़ता है, जो लगभग 250 किलोमीटर लंबा है और इसमें 5 से 6 घंटे का समय लगता है।

नया एक्सप्रेसवे: यह मात्र 210 किलोमीटर लंबा है।

समय की बचत: सिग्नल-फ्री और 6-लेन का यह ग्रीनफील्ड हाईवे आपके सफर का आधा समय बचा देगा।

रूट मैप: यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली और सहारनपुर के रास्ते सीधे देहरादून (आशारोड़ी) तक पहुंचेगा।

टोल दरें: जेब पर कितना पड़ेगा असर?

सुविधा और रफ्तार के साथ इस सफर के लिए आपको पुराने रास्ते के मुकाबले ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। एक्सप्रेसवे पर सफर के लिए प्रस्तावित टोल दरें इस प्रकार हैं:

एक तरफ का सफर (Single Trip): लगभग ₹675

24 घंटे के भीतर वापसी (Round Trip): लगभग ₹1,010

तुलना: पुराने मेरठ-रुड़की मार्ग पर कुल टोल लगभग ₹445 लगता है, लेकिन वहां समय और ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

एशिया का सबसे बड़ा 'वाइल्डलाइफ कॉरिडोर'

इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका अंतिम हिस्सा है। राजाजी नेशनल पार्क के पास करीब 12 किलोमीटर का एलिवेटेड हिस्सा बनाया गया है, जो एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव गलियारा (Wildlife Corridor) है। इसके नीचे से जानवर आसानी से गुजर सकेंगे और ऊपर से गाड़ियाँ फर्राटा भरेंगी।

लोनली बॉर्डर तक का सफर होगा 'टोल-फ्री'

स्थानीय यात्रियों और दिल्ली-एनसीआर के लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने एक राहत दी है। अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक का लगभग 18 किलोमीटर का हिस्सा टोल-फ्री रखा गया है। इससे दिल्ली और गाजियाबाद के स्थानीय ट्रैफिक को बड़ी राहत मिलेगी।

निवेश और कमाई का गणित

लगभग ₹12,000 करोड़ की लागत से बनी इस परियोजना से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सालाना ₹900 से ₹950 करोड़ की टोल आय होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 13 वर्षों में इस प्रोजेक्ट की लागत टोल वसूली से पूरी हो जाएगी।