Bihar Politics: नीतीश के नए प्लान से विरोधी खेमे में सन्नाटा, 2025 के चुनाव से पहले ये कैसा खेल?
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति (Bihar Politics) एक ऐसी जगह है जहाँ कब क्या हो जाए, बड़े-बड़े पंडित भी ठीक से बता नहीं पाते। इन दिनों पटना के सियासी गलियारों में फिर से एक ही चर्चा का बाज़ार गर्म है—कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी टीम को लेकर मंथन कर रहे हैं, और सच पूछिए तो इस बार मामला सिर्फ कुर्सी का नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत करने का भी है।
अगर आप सोच रहे हैं कि सब कुछ शांति से हो रहा है, तो आप गलत हैं। पर्दे के पीछे 'रस्साकशी' का खेल ज़बरदस्त चल रहा है। ख़बर है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अपने पांचवें कार्यकाल की तैयारियों को लेकर कोई भी कच्चा दांव नहीं खेलना चाहते। वे बहुत ही सोच-समझकर उन चेहरों को मौका देना चाहते हैं जो ज़मीन पर पकड़ रखते हों और जातीय समीकरण को साध सकें।
क्यों फंसा है कैबिनेट का पेंच?
असल में, बिहार कैबिनेट में मंत्री बनने की दौड़ (Ministerial Berth Race) इतनी तेज़ है कि हर नेता अपनी गोटी फिट करने में लगा है। लेकिन नीतीश बाबू का स्टाइल हम सब जानते हैं—वे आखिरी पल तक अपने पत्ते नहीं खोलते। चर्चा यह है कि गठबंधन के साथियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर थोड़ी बहुत खींचतान चल रही है। कोई मलाईदार विभाग चाहता है, तो कोई अपने पुराने वफादारों को सेट करना चाहता है।
2025 का चुनावी गणित
इस पूरी कवायद को सिर्फ एक सामान्य कैबिनेट विस्तार समझना भूल होगी। यह Bihar Assembly Election 2025 की नींव तैयार करने जैसा है। नीतीश कुमार चाहते हैं कि उनकी नई टीम ऐसी हो जो जनता के बीच जाए तो काम का हिसाब दे सके, न कि सिर्फ नेतागिरी झाड़े। इसलिए, इस बार दागी और सुस्त नेताओं की छुट्टी हो सकती है और कुछ नए, युवा और तेज-तर्रार चेहरों को जगह मिल सकती है।
जनता के मन में क्या है?
आम जनता अब राजनीतिक ड्रामे से ज्यादा विकास पर नज़र टिकाए बैठी है। लोग देखना चाहते हैं कि जिन मंत्रियों को शपथ (Oath Taking) दिलाई जाएगी, क्या वे वाकई बिहार की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार के मुद्दों पर काम करेंगे? बहरहाल, पटना से लेकर दिल्ली तक फ़ोन की घंटियां बज रही हैं और लॉबिंग तेज है। देखना दिलचस्प होगा कि जब फाइनल लिस्ट (Bihar Cabinet Final List) सामने आती है, तो किसके चेहरे पर मुस्कान होगी और किसका दिल टूटेगा।
फिलहाल, बिहार की सियासत में इंतज़ार की घड़ियाँ गिनना ही सबसे बड़ा काम बन गया है। लेकिन एक बात तय है, नीतीश कुमार जो भी फैसला लेंगे, वह आने वाले समय में बिहार की दशा और दिशा दोनों तय करेगा।