Bihar Politics: RBI गवर्नर की नीतीश-सम्राट से खास मुलाकात, विजय सिन्हा और वित्त मंत्री को किनारे करने के क्या हैं मायने?
News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासत में इन दिनों जो कुछ भी घट रहा है, उसके तार सीधे दिल्ली के गलियारों से जुड़े नजर आ रहे हैं। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नवनियुक्त गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) की पटना यात्रा ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। गवर्नर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से तो लंबी मुलाकात की, लेकिन राज्य के दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और वरिष्ठतम मंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव से दूरी बनाए रखी। इस 'चयनित' मुलाकात को लेकर अब बिहार में अटकलें तेज हैं—क्या बीजेपी और केंद्र सरकार ने नीतीश के बाद बिहार की कमान सौंपने के लिए अपना 'चेहरा' चुन लिया है?
मुलाकात का प्रोटोकॉल और 'सियासी संदेश'
आमतौर पर जब केंद्रीय बैंक का कोई बड़ा अधिकारी राज्य के दौरे पर होता है, तो वह वित्त विभाग और संबंधित मंत्रियों से औपचारिक भेंट करता है। लेकिन संजय मल्होत्रा की इस यात्रा में प्रोटोकॉल से ज्यादा 'पॉलिटिक्स' नजर आई:
नीतीश और सम्राट पर फोकस: गवर्नर ने सीएम आवास पर नीतीश कुमार से मुलाकात की, जहां सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। इसे राज्य के आर्थिक विकास और बैंकिंग सुधारों पर चर्चा बताया गया।
विजय सिन्हा को क्यों नहीं मिला समय? दूसरे डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को इस मुलाकात से दूर रखा गया। जानकार इसे बीजेपी के भीतर 'पावर शिफ्ट' के रूप में देख रहे हैं, जहां सम्राट चौधरी को विजय सिन्हा की तुलना में अधिक तरजीह दी जा रही है।
वित्त मंत्री की अनदेखी: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गवर्नर ने राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव से भी मुलाकात नहीं की, जबकि तकनीकी रूप से आरबीआई का सीधा संवाद वित्त विभाग से होता है।
26 मार्च के बाद 'बड़ा खेला' होने के संकेत?
बिहार की राजनीति में चर्चा है कि नीतीश कुमार अपनी 'समृद्धि यात्रा' के बाद कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ: अपनी यात्रा के दौरान नीतीश कुमार कई बार सार्वजनिक मंचों पर सम्राट चौधरी के प्रति अपना स्नेह और भरोसा जता चुके हैं। इसे 'उत्तराधिकारी' की अनौपचारिक घोषणा के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी का प्लान-2026: दिल्ली में बैठे बीजेपी आलाकमान के संकेतों को देखें, तो सम्राट चौधरी को 'अगले मुख्यमंत्री' के तौर पर प्रोजेक्ट करने की तैयारी तेज हो गई है। अप्रैल के पहले या दूसरे हफ्ते में बीजेपी विधायक दल की अहम बैठक संभावित है, जिसमें सीएम पद के लिए नाम पर मुहर लग सकती है।
नीतीश की भूमिका: माना जा रहा है कि नीतीश कुमार खुद को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी से मुक्त कर केंद्र में किसी बड़ी भूमिका (संभवतः उपराष्ट्रपति या राज्यसभा सदस्य) की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
विपक्ष का तंज: "दिल्ली तय कर रही बिहार का भविष्य"
महागठबंधन और विशेषकर आरजेडी ने इस मुलाकात को 'लोकतंत्र का अपमान' बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब वित्त मंत्री और एक डिप्टी सीएम को दरकिनार किया जाता है, तो साफ है कि सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और दिल्ली सीधे तौर पर बिहार के प्रशासनिक फैसलों में हस्तक्षेप कर रही है।