Bihar Politics : सुनवाई टालने का पैंतरा या डर? राबड़ी देवी की अर्जी ने सबको चौंकाया
News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति और लालू यादव (Lalu Prasad Yadav) के परिवार की मुश्किलें... ये दोनों चीजें लगता है कभी खत्म नहीं होंगी। 'लैंड फॉर जॉब स्कैम' (जमीन के बदले नौकरी घोटाला) और आईआरसीटीसी घोटाले (IRCTC Scam) में फंसा लालू परिवार कोर्ट के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब इस केस में एक बहुत ही दिलचस्प और बड़ा मोड़ आ गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Rabri Devi) ने कोर्ट में एक ऐसी अर्जी (Application) लगा दी है, जिसने सबको चौंका दिया है। उन्होंने अपने केस की सुनवाई कर रहे विशेष जज विशाल गोगने (Vishal Gogne) को बदलने की मांग कर दी है।
आइये, बिल्कुल सरल भाषा में समझते हैं कि आखिर कोर्ट के अंदर क्या चल रहा है और राबड़ी देवी ने ऐसा क्यों किया?
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े दो बड़े मामलों की सुनवाई चल रही है— पहला लैंड फॉर जॉब स्कैम और दूसरा IRCTC टेंडर घोटाला।
इन मामलों की सुनवाई स्पेशल जज विशाल गोगने की अदालत में हो रही थी। ये वही जज हैं जो अपने सख्त फैसलों और तीखे सवालों के लिए जाने जाते हैं।
राबड़ी देवी को जज से क्या दिक्कत है?
अर्जी में राबड़ी देवी की तरफ से कहा गया है कि उन्हें मौजूदा जज की निष्पक्षता पर शक है। आसान शब्दों में कहें तो, उन्हें लगता है कि जज विशाल गोगने उनकी दलीलों को उस तरह से नहीं सुन रहे, जैसे सुनना चाहिए, या उनके मन में पहले से ही कुछ पूर्वाग्रह (Bias) है।
इसलिए, उन्होंने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज (प्रधान जिला न्यायाधीश) से गुहार लगाई है कि उनका केस जज विशाल गोगने की कोर्ट से हटाकर किसी और जज (Transferred) को सौंप दिया जाए।
सियासी गलियारों में चर्चा: ये 'डर' है या 'रणनीति'?
जैसे ही यह खबर बाहर आई, वकीलों और राजनीतिक पंडितों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।
कुछ लोग कह रहे हैं कि यह एक कानूनी अधिकार है। अगर आरोपी को लगता है कि उसे न्याय नहीं मिल पा रहा, तो वह जज बदलने की मांग कर सकता है।
वहीं, विरोधी इसे 'देरी करने की चाल' बता रहे हैं। अक्सर जब कोई हाई-प्रोफाइल केस अपने अंतिम नतीजों की तरफ बढ़ता है, तो इस तरह की अर्जियां लीगल दांव-पेच का हिस्सा होती हैं ताकि फैसला आने में थोड़ा और वक्त लग जाए।
आगे क्या होगा?
अब प्रधान जिला जज (Principal District Judge) राबड़ी देवी की इस अर्जी पर फैसला लेंगे। उन्हें तय करना होगा कि क्या राबड़ी देवी की चिंताएं जायज हैं या नहीं। अगर अर्जी मान ली गई, तो केस दूसरे जज के पास जाएगा और सुनवाई फिर नए सिरे से शुरू हो सकती है। और अगर अर्जी खारिज हुई, तो सुनवाई जज विशाल गोगने ही जारी रखेंगे।
कुल मिलाकर, लालू परिवार ने गेंद अब ऊपरी अदालत के पाले में डाल दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस "अविश्वास प्रस्ताव" पर क्या फैसला लेता है।