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April 10 2026 03:30 am

Bihar Politics : नीतीश के निशांत का सियासी शंखनाद भावुक होकर बोले मुझ पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में 'नीतीश युग' के अगले पड़ाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। राजनीति की चकाचौंध से दूर रहने वाले निशांत ने पहली बार सार्वजनिक मंच से जनता के बीच अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। निशांत ने बेहद भावुक अंदाज में लोगों से समर्थन मांगते हुए कहा कि वे उन पर अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखें। उनके इस बयान को बिहार की भविष्य की राजनीति और जेडीयू (JDU) में उनके बढ़ते कद के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

'मेरे पिता ने बिहार को संवारा है' - पिता के काम पर जताया गर्व

निशांत कुमार ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "मेरे पिता ने अपना पूरा जीवन बिहार की सेवा में समर्पित कर दिया है। उन्होंने जो लकीर खींची है, उसे मिटाना नामुमकिन है। बिहार की जनता कभी उनके योगदान को भूल नहीं पाएगी।" निशांत ने आगे कहा कि विकास की जो यात्रा उनके पिता ने शुरू की थी, उसे आगे ले जाना हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है जो बिहार से प्रेम करता है।

क्या राजनीति में एंट्री की है तैयारी? बयानों से मिले संकेत

अब तक लो-प्रोफाइल रहने वाले निशांत कुमार का अचानक सक्रिय होना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जब उनसे राजनीति में आने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके "आशीर्वाद बनाए रखने" वाले आग्रह को उनकी 'पॉलिटिकल लॉन्चिंग' की तैयारी माना जा रहा है। जेडीयू के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद निशांत संगठन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, ताकि पार्टी की विरासत को मजबूती से संभाला जा सके।

प्रशंसकों और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह

निशांत कुमार के इस बयान के बाद जेडीयू कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है। पटना की सड़कों पर निशांत के समर्थन में पोस्टर लगने शुरू हो गए हैं, जिनमें उन्हें 'बिहार का भविष्य' बताया जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दल इसे 'परिवारवाद' का नाम दे रहे हैं, लेकिन जेडीयू का कहना है कि निशांत एक शिक्षित और संवेदनशील युवा हैं और अगर वे जनता की सेवा करना चाहते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। फिलहाल, 10 अप्रैल की दिल्ली बैठक से पहले निशांत का यह बयान बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर चुका है।