Bihar Politics : 20 साल में पहली बार! ईद पर गांधी मैदान नहीं पहुंचे नीतीश कुमार, बेटे निशांत की लॉन्चिंग या सेहत का तकाजा
News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासत में आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। पिछले दो दशकों से चली आ रही एक अटूट परंपरा आज टूट गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar), जो हर साल ईद के मौके पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान पहुंचकर नमाजियों को गले लगाकर मुबारकबाद देते थे, इस बार वहां नजर नहीं आए। यह 20 वर्षों में पहला मौका है जब मुख्यमंत्री इस समारोह से दूर रहे। हालांकि, उनकी कमी को उनके इकलौते बेटे निशांत कुमार (Nishant Kumar) ने पूरा किया, जिसे जानकार जेडीयू के भीतर एक 'नए युग' और 'उत्तराधिकारी' के उदय के रूप में देख रहे हैं।
निशांत कुमार ने संभाली कमान: 'नीतीश स्टाइल' में दिखे जूनियर
गांधी मैदान में आज सुबह का नजारा बदला-बदला था। मुख्यमंत्री की जगह उनके बेटे निशांत कुमार नमाजियों के बीच पहुंचे।
मुबारकबाद: निशांत ने अपने पिता की ओर से बिहार और देशवासियों को ईद की बधाई दी। उन्होंने कहा, "अल्लाह ताला सबको बरकत दें। मैं अपने पिता और अपनी ओर से सभी को शुभकामनाएं देता हूं।"
अंदाज-ए-बयां: सफेद कुर्ता-पायजामा और सिर पर टोपी पहने निशांत बिल्कुल अपने पिता के चिर-परिचित अंदाज में दिखे। उन्होंने नमाजियों से हाथ मिलाया और इमाम के साथ मंच भी साझा किया।
सीक्रेट मीटिंग: गांधी मैदान से निकलने के बाद निशांत सीधे जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह के आवास पहुंचे, जहां उनके बीच करीब 15 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई।
क्या हैं इसके सियासी मायने? (The Political Shift)
नीतीश कुमार का इस तरह सार्वजनिक मंचों से दूरी बनाना और बेटे को आगे करना, बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है:
सियासी उत्तराधिकारी: हाल ही में निशांत कुमार ने जेडीयू की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की है। उन्हें इस तरह अहम मौकों पर भेजना यह साफ करता है कि नीतीश अब उन्हें अपनी राजनीतिक विरासत सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।
सेहत की चर्चा: राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार की सेहत में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिस कारण वे भारी भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों से बच रहे हैं।
निशांत युग की शुरुआत: पार्टी के भीतर अब 'निशांत युग' की चर्चाएं तेज हैं। हाल ही में हुई इफ्तार पार्टी में भी निशांत काफी सक्रिय दिखे थे, जबकि नीतीश कुमार वहां केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका में शांत बैठे नजर आए थे।
जेडीयू में नई ऊर्जा या 'परिवारवाद' का डर?
नीतीश कुमार हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं, लेकिन निशांत की सक्रियता ने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया है। हालांकि, जेडीयू के नेता इसे 'नई ऊर्जा' के रूप में देख रहे हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि नीतीश अब राज्यसभा जाने और केंद्र की राजनीति में भूमिका निभाने की तैयारी में हैं, ऐसे में बिहार में पार्टी को एकजुट रखने के लिए निशांत एक 'सर्वमान्य चेहरा' साबित हो सकते हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा
भले ही मुख्यमंत्री खुद नहीं पहुंचे, लेकिन सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। निशांत कुमार की सुरक्षा में सीएम सिक्योरिटी की टीम तैनात रही। उनके साथ मंत्री अशोक चौधरी समेत जेडीयू के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे, जो इस बात की पुष्टि करता है कि निशांत को अब सरकारी और पार्टी प्रोटोकॉल में अहम स्थान दिया जा रहा है।