Bihar Police Action : STF जवान की शहादत के बाद DGP का बड़ा फैसला अब छापेमारी के लिए माननी होगी ये SOP
News India Live, Digital Desk: बिहार में अपराधियों के खिलाफ अभियान के दौरान पुलिस पर बढ़ते हमलों को देखते हुए डीजीपी विनय कुमार ने पुलिसिंग के पुराने तौर-तरीकों में बड़े बदलाव किए हैं। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई उच्चस्तरीय बैठक में डीजीपी ने स्पष्ट किया कि अब राज्य में कोई भी छापेमारी बिना पूर्व निर्धारित एसओपी (SOP) के नहीं होगी। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
छापेमारी के लिए नई SOP की 5 मुख्य बातें:
वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना: अब किसी भी छापेमारी से पहले क्षेत्र के सर्किल इंस्पेक्टर (CI) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) को सूचित करना अनिवार्य होगा।
बैकअप टीम की मौजूदगी: बिना पर्याप्त बैकअप फोर्स और सुरक्षा उपकरणों (जैसे बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट) के अपराधी के ठिकाने पर दबिश नहीं दी जाएगी।
तकनीकी निगरानी: रेड से पहले इलाके की पूरी रेकी और अपराधियों की संभावित ताकत (हथियारों की संख्या) का तकनीकी विश्लेषण करना होगा।
क्षेत्रीय तालमेल: यदि टीम दूसरे जिले या थाना क्षेत्र में जा रही है, तो स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय (Coordination) करना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।
जवाबदेही तय: छापेमारी के दौरान यदि एसओपी का उल्लंघन पाया गया, तो नेतृत्व करने वाले अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
क्या थी मोतिहारी मुठभेड़ की घटना? (The Backdrop)
धमकी भरा कॉल: कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर ने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा था कि वह 10-15 पुलिसकर्मियों को मार गिराएगा।
एनकाउंटर: पुलिस ने तकनीकी इनपुट के आधार पर रामडीह गांव में छापेमारी की। अपराधियों ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
शहादत और ढेर: इस मुठभेड़ में एसटीएफ जवान श्रीराम यादव शहीद हो गए। जवाबी कार्रवाई में दो मुख्य अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मारे गए।
बरामदगी: मौके से एक कार्बाइन, पिस्तौलें और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए।
मुजफ्फरपुर कांड पर भी सख्त रुख
बैठक के दौरान डीजीपी ने मुजफ्फरपुर के एक पुराने पॉक्सो (POCSO) मामले में भी नाराजगी जताई, जहाँ 2 साल बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। उन्होंने जांच अधिकारी (IO) की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं।