Bihar Health Scheme : नीतीश सरकार का बड़ा तोहफ़ा, डायल 112 पर अब प्राइवेट एंबुलेंस भी मिलेगी

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News India Live, Digital Desk: बीमारी बताकर नहीं आती। अक्सर हमने देखा है कि रात-बेरात अगर घर में कोई बीमार पड़ जाए, तो सबसे बड़ी टेंशन होती है एंबुलेंस (Ambulance) की। सरकारी एंबुलेंस मिलने में कई बार देरी हो जाती है और प्राइवेट वाले अपनी मनमानी कीमत मांगते हैं।

लेकिन अब बिहार के लोगों को इस चिंता से बहुत बड़ी राहत मिलने वाली है। नीतीश सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो इमरजेंसी के वक़्त किसी वरदान से कम नहीं होगा।

क्या है सरकार का नया प्लान?
अब तक हम 'डायल 112' (Dial 112) का इस्तेमाल पुलिस, आग (Fire) या एक्सीडेंट जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए करते थे। लेकिन अब सरकार इसमें 'प्राइवेट एंबुलेंस' को भी जोड़ने जा रही है।
जी हाँ, इसका मतलब यह है कि अगर आप 112 नंबर डायल करेंगे, तो ऑपरेटर सिर्फ़ सरकारी एंबुलेंस नहीं, बल्कि आपके पास मौजूद किसी प्राइवेट एंबुलेंस को भी आपके लिए भेज सकेगा।

इससे आपको क्या फ़ायदा होगा?

  1. समय की बचत: एमरजेंसी में एक-एक मिनट कीमती होता है। अब आपको प्राइवेट एंबुलेंस के नंबर ढूँढने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। एक ही नंबर '112' सब काम कर देगा।
  2. किराये की मनमानी पर रोक: अक्सर देखा गया है कि मजबूरी का फायदा उठाकर प्राइवेट वाले मुँहमांगा पैसा मांगते हैं। जब ये 112 नेटवर्क से जुड़ जाएंगे, तो उम्मीद है कि इनका किराया भी सरकार के तय मानकों (Standard Rates) के हिसाब से रेगुलेट होगा। यानी, लूट-खसोट बंद!
  3. ट्रैकिंग में आसानी: 112 सिस्टम हाईटेक है। इसमें पता चल जाएगा कि एंबुलेंस कहाँ है और कितनी देर में पहुंचेगी।
  4. ज्यादा गाड़ियां उपलब्ध: सरकारी एंबुलेंस सीमित होती हैं, लेकिन प्राइवेट जुड़ने से गाड़ियों की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे मरीज को इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
जैसे आप अभी पुलिस के लिए 100 या 112 मिलाते हैं, वैसे ही कॉल करना होगा। कंट्रोल रूम में बैठा अधिकारी चेक करेगा कि आपके घर के सबसे नज़दीक कौन सी एंबुलेंस (सरकारी या प्राइवेट) खाली है, और उसे तुरंत आपके पास भेजा जाएगा।

यह ओला-ऊबर (Ola/Uber) की तरह है जो गाड़ी पास होगी, वही आएगी!

सरकार की मंशा
स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि गांव हो या शहर, किसी भी मरीज की जान सिर्फ इसलिए न जाए क्योंकि उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने वाली गाड़ी नहीं मिली। इसे जल्द ही पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी है।