Bihar elections 2025 : प्रशांत किशोर धंधा चला रहे हैं , BJP अध्यक्ष ने सीधे बोला अटैक, संपत्ति विवाद पर बिहार में छिड़ी नई जंग
News India Live, Digital Desk: Bihar elections 2025 : बिहार की राजनीति में आजकल एक नया विवाद शुरू हो गया है, जिसने नेताओं की संपत्ति और बेनामी ज़मीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने चेतावनी दी थी कि वे बिहार के बड़े-बड़े नेताओं की बेनामी संपत्तियों (benami properties) का खुलासा करेंगे। उनके इस 'खुलेआम चुनौती' के बाद, अब बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने पलटवार करते हुए अपने परिवार की संपत्ति का ब्योरा दिया है। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर है।
सम्राट चौधरी का 'प्रशांत किशोर' को जवाब
प्रशांत किशोर की धमकी के बाद, जब सम्राट चौधरी से सवाल किया गया, तो उन्होंने पटना में पत्रकारों से बात करते हुए साफ-साफ कहा, "मैं खुले तौर पर कह रहा हूँ, सम्राट चौधरी या मेरे परिवार के पास पटना शहर में केवल 5 कट्ठा (5 katthas) ज़मीन है।" उन्होंने कहा कि बाकी सारी पैतृक संपत्तियाँ उनके अपने ज़िले या दूसरे ज़िलों में हैं, जो बेनामी बिल्कुल नहीं हैं। चौधरी ने दावा किया कि उनके परिवार के पास एक भी बेनामी संपत्ति नहीं है। उन्होंने प्रशांत किशोर को सीधे चुनौती देते हुए कहा, "मैं प्रशांत किशोर को न्योता देता हूँ, अगर उन्हें लगता है कि मेरी कोई बेनामी संपत्ति है, तो उन्हें उसकी जांच ज़रूर करनी चाहिए।" यह सम्राट चौधरी का आत्मविश्वास दिखाता है।
प्रशांत किशोर पर सम्राट चौधरी का हमला
सम्राट चौधरी यहीं नहीं रुके, उन्होंने प्रशांत किशोर के 'जन सुराज' (Jan Suraaj) अभियान पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, "प्रशांत किशोर समाज सेवा नहीं कर रहे हैं, बल्कि पैसा कमाने का व्यवसाय चला रहे हैं।" उन्होंने प्रशांत किशोर की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर सवाल उठाए और कहा कि 'जन सुराज' सिर्फ़ उन लोगों को उजागर करने के नाम पर पैसे बटोरने का काम कर रहा है, जिनके पास कथित तौर पर फर्जी संपत्तियां हैं। चौधरी ने आरोप लगाया कि पीके ने अपनी पिछली पार्टी, 'जनता दल यूनाइटेड' (JDU) को छोड़ दिया और अब कांग्रेस के लिए पैसा इकट्ठा कर रहे हैं। यह एक गंभीर राजनीतिक आरोप है।
जन सुराज बनाम बीजेपी: संपत्ति का मुद्दा
इस बयान से साफ है कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में नेताओं की संपत्तियाँ और पारदर्शिता एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती हैं। प्रशांत किशोर लगातार भ्रष्टाचार और परिवारवाद को निशाना बना रहे हैं, वहीं बीजेपी भी उन पर हमलावर है। चौधरी के बयान ने राजनीतिक गलियारों में गरमाहट ला दी है। बिहार की सियासत में यह एक नई बहस छेड़ रहा है।
कुल मिलाकर, बिहार में राजनीतिक माहौल तेज़ी से गर्म हो रहा है, और अब संपत्ति विवाद पर वार-पलटवार एक आम बात होती जा रही है। जनता भी यह देखना चाहती है कि इस विवाद का आखिर क्या नतीजा निकलता है