Bihar Elections 2025 : बीजेपी नहीं अपनाएगी गुजरात मॉडल ,तीन सूत्रीय फॉर्मूला से चुनेगी उम्मीदवार
News India Live, Digital Desk: बिहार की चुनावी रणभूमि के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी रणनीतियों पर गहन मंथन कर रही है. आगामी बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि इस बार बीजेपी 'गुजरात मॉडल' को नहीं अपनाएगी, यानी उम्मीदवारी में बड़े पैमाने पर चेहरे बदलने से परहेज करेगी. बल्कि, पार्टी उम्मीदवारों के चयन के लिए एक खास 'तीन सूत्रीय फार्मूला' पर काम करेगी.
दरअसल, गुजरात मॉडल में बीजेपी ने अक्सर एंटी-इनकम्बेंसी से बचने के लिए बड़ी संख्या में अपने वर्तमान विधायकों और नेताओं के टिकट काट दिए थे और नए चेहरों को मौका दिया था. यह मॉडल काफी सफल भी रहा था. लेकिन बिहार की अलग सियासी जमीनी हकीकत को देखते हुए, पार्टी ने गुजरात के इस प्रयोग को सीधे-सीधे दोहराने से मना कर दिया है.
उम्मीदवारों के चयन का 'तीन सूत्रीय फार्मूला' क्या है?
बताया जा रहा है कि बीजेपी बिहार में अपने उम्मीदवारों को चुनने के लिए इन तीन अहम बिंदुओं पर ध्यान देगी:
- जीतने की क्षमता (Winnability): सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण मानदंड यह होगा कि संबंधित उम्मीदवार अपनी सीट पर कितना जीतू (winnable) है. उसकी लोकप्रियता, क्षेत्र में उसकी पैठ और चुनावी समीकरणों में उसकी पकड़ पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा.
- सामाजिक समीकरण (Social Equation): बिहार में जातिगत समीकरण हमेशा से चुनाव परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं. इसलिए, बीजेपी उम्मीदवारों का चयन करते समय क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन का खास ध्यान रखेगी, ताकि सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके.
- पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण (Loyalty and Dedication to Party): ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी जो लंबे समय से पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं, उन्होंने पार्टी के लिए काम किया है और पार्टी की विचारधारा को आत्मसात किया है.
इस रणनीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिहार जैसे जटिल राज्य में जहां जातीय और क्षेत्रीय समीकरण बहुत मायने रखते हैं, वहां सिर्फ बड़े बदलाव करने की बजाय सोच-समझकर, जमीनी हकीकत के आधार पर उम्मीदवार चुने जाएं. बीजेपी के इस कदम से एनडीए गठबंधन के भीतर भी एक संदेश जाएगा कि पार्टी जीतने की क्षमता और निष्ठा को सबसे ऊपर रखती है.
यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार चुनाव 2025 में बीजेपी की यह 'तीन सूत्रीय फार्मूला' रणनीति कितनी सफल साबित होती है और यह किस तरह से चुनावी परिणामों को प्रभावित करती है