Bihar Budget 2026 : बिहार के हर गांव में खुलेगी दूध समिति, हर पंचायत में बिकेगा सुधा का दूध, नीतीश सरकार का मेगा प्लान

Post

News India Live, Digital Desk:  बिहार के बजट 2026-27 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 'श्वेत क्रांति' (White Revolution) को गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सरकार ने घोषणा की है कि राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन किया जाएगा और हर ग्राम पंचायत में एक सुधा बिक्री केंद्र (Sudha Sales Center) खोला जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को उनके दूध का सही दाम दिलाना और मिलावट मुक्त डेयरी उत्पादों को सुलभ बनाना है।

डेयरी सेक्टर के लिए 4 बड़े ऐलान

हर गांव में दुग्ध समिति: अब पशुपालकों को अपना दूध बेचने के लिए दूर नहीं जाना होगा। गांव में ही समिति होने से बिचौलियों का खेल खत्म होगा और किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान मिलेगा।

पंचायत स्तर पर सुधा पार्लर: अभी तक सुधा के उत्पाद मुख्य रूप से शहरों या प्रखंडों (Blocks) तक सीमित थे। अब हर पंचायत में सुधा का आधिकारिक बिक्री केंद्र होगा, जिससे स्थानीय लोगों को ताज़ा दूध, दही, घी और पनीर मिल सकेगा।

कोल्ड चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर: दूध को खराब होने से बचाने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर बल्क मिल्क कूलर (BMC) और चिलिंग सेंटर्स का जाल बिछाएगी।

रोजगार के अवसर: हर पंचायत में बिक्री केंद्र खुलने से हजारों ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार (Self-employment) मिलेगा।

कैसे काम करेगा यह नया मॉडल?

सरकार का लक्ष्य 'कॉर्पोरेट डेयरी मॉडल' को जमीनी स्तर पर उतारना है। इसमें 'सुधा' (Comfed) एक सेतु का काम करेगी।

उत्पादन (Production): गांव की दुग्ध समितियां सीधे किसानों से दूध एकत्रित करेंगी।

प्रोसेसिंग (Processing): जिला दुग्ध संघों (जैसे कॉम्फेड) द्वारा दूध की गुणवत्ता जांच और प्रोसेसिंग की जाएगी।

वितरण (Distribution): पंचायत स्तर के सुधा केंद्रों के माध्यम से इसे सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाएगा।

पशुपालकों को क्या होगा फायदा?

बेहतर नस्ल और चिकित्सा: समितियों के माध्यम से किसानों को पशुओं के लिए उन्नत चारा (Cattle Feed) और पशु चिकित्सा सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी।

बोनस और सब्सिडी: दुग्ध समितियों से जुड़े किसानों को साल के अंत में लाभांश (Bonus) और सरकारी योजनाओं (जैसे पशु शेड या ऋण) का सीधा लाभ मिलता है।

स्थिर आय: खेती में अनिश्चितता के बीच, डेयरी एक ऐसा क्षेत्र है जो साल भर नकद आय सुनिश्चित करता है।

बजट 2026: पशुपालन और मत्स्य विभाग का फोकस

इस योजना के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि यदि बिहार का डेयरी सेक्टर मजबूत होता है, तो ग्रामीण पलायन (Migration) में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, मछली पालन और मुर्गी पालन के लिए भी नई सब्सिडी योजनाओं का विस्तार किया गया है।