ईरान के खिलाफ छिड़ा महायुद्ध इजरायल ने UAE भेजे अपने सैनिक और आयरन डोम, अमेरिका-ईरान जंग के बीच लिया फैसला
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में हालात अब बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी सीधी जंग के बीच इजरायल ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा के लिए अपनी सबसे घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'आयरन डोम' (Iron Dome) और अपनी सेना की टुकड़ियों को वहां तैनात कर दिया है। यह कदम ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के बढ़ते खतरों को देखते हुए उठाया गया है।
ईरानी मिसाइलों के खिलाफ इजरायली कवच
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यह पहली बार है जब इजरायल ने इतनी सक्रियता से किसी अरब देश की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार किया है। इजरायल का 'आयरन डोम' दुनिया के सबसे प्रभावी मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स में से एक माना जाता है। इसे UAE में तैनात करने का मुख्य उद्देश्य ईरान की ओर से आने वाली शॉर्ट-रेंज मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करना है। जानकारों का मानना है कि यह तैनाती अब्राहम एकॉर्ड (Abraham Accords) के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है।
अमेरिका-ईरान युद्ध की आग में घी
पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है। खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिसका जवाब अमेरिका हवाई हमलों से दे रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह खाड़ी के उन देशों को भी निशाना बनाएगा जो अमेरिका या इजरायल का साथ देंगे। इसी खतरे को भांपते हुए इजरायल और UAE ने अपनी रक्षा पंक्ति को मजबूत करने के लिए यह रणनीतिक साझेदारी की है।
मैदान में उतरे इजरायली सैनिक
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि इजरायली रक्षा बल (IDF) के विशेषज्ञ और सैनिक भी UAE पहुंच चुके हैं। ये सैनिक वहां के स्थानीय बलों को आयरन डोम के संचालन और रडार सिस्टम को एकीकृत करने में मदद करेंगे। इजरायल की यह सीधी भागीदारी दिखाती है कि वह ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस तैनाती से ईरान और उसके समर्थित गुटों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
बदलते समीकरण: अरब और इजरायल एक साथ
इजरायल का यह कदम खाड़ी देशों की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है। कभी एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे देश अब एक साझा दुश्मन (ईरान) के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। इस सैन्य मोर्चेबंदी ने ईरान को रणनीतिक रूप से बैकफुट पर धकेल दिया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इजरायल की इस सक्रियता से पूरे क्षेत्र में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) का खतरा और अधिक बढ़ गया है।