कानपुर रजिस्ट्री ऑफिस में 3500 करोड़ का महाघोटाला, इनकम टैक्स सर्वे में खुला राज

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने शासन-प्रशासन की नींव हिला दी है। कानपुर रजिस्ट्री ऑफिस में आयकर विभाग (Income Tax) के सर्वे के दौरान 3500 करोड़ रुपये के बेनामी लेनदेन और टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस भारी-भरकम राशि के पीछे शहर के कई नामी बिल्डर्स, सब-रजिस्ट्रार और भू-माफियाओं का एक मजबूत गठजोड़ (Nexus) काम कर रहा था।

कैसे हुआ इस घोटाले का खुलासा?

आयकर विभाग की टीम ने कानपुर के रजिस्ट्री कार्यालयों और संबंधित बिल्डरों के ठिकानों पर गोपनीय तरीके से सर्वे शुरू किया था। जांच के दौरान अधिकारियों को ऐसे दस्तावेजों और कंप्यूटर एंट्रीज का पता चला, जिनका मिलान सरकारी रिकॉर्ड से नहीं हो रहा था।

बेनामी संपत्ति: सैकड़ों एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त में असली खरीदारों के नाम छिपाए गए।

सर्किल रेट का खेल: जमीनों की रजिस्ट्री बाजार दर से बहुत कम (सर्किल रेट पर या उससे भी नीचे) दिखाकर करोड़ों की स्टांप चोरी की गई।

नकद लेनदेन: जमीन के सौदों में 3500 करोड़ रुपये का लेनदेन नकद (Cash) में किया गया, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं था।

घोटाले की मुख्य बातें (Key Findings of IT Survey)

विवरणप्रभाव/नुकसान
घोटाले की अनुमानित राशि₹3,500 करोड़
मुख्य आरोपीबड़े बिल्डर्स, रजिस्ट्री विभाग के अफसर और वकील।
जांच का दायरापिछले 5 वर्षों की गई सभी बड़ी रजिस्ट्रियां।
राजस्व की हानिउत्तर प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के स्टांप ड्यूटी का नुकसान।

कैसे काम करता था यह 'सिंडिकेट'?

जांच में खुलासा हुआ है कि बिल्डर्स और रजिस्ट्री ऑफिस के कर्मचारी मिलकर 'काले धन' को सफेद करने का खेल खेल रहे थे।

फर्जी कंपनियां: कई ऐसी कंपनियों के नाम पर जमीनें खरीदी गईं जिनका अस्तित्व केवल कागजों पर था।

बैक-डेटिंग: कुछ दस्तावेजों में हेराफेरी कर पुरानी तारीखों में रजिस्ट्रियां की गईं ताकि नए नियमों और बढ़े हुए टैक्स से बचा जा सके।

अफसरों की मिलीभगत: सब-रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारियों ने बिना उचित भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के इन संदिग्ध सौदों को हरी झंडी दे दी।

योगी सरकार का कड़ा रुख

इस घोटाले की रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय पहुंचने के बाद हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। आयकर विभाग अब उन पैन कार्ड्स (PAN Cards) और बैंक खातों की जांच कर रहा है, जिनके जरिए यह लेनदेन हुआ। आने वाले दिनों में कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

 क्या होगा आम जनता पर असर?

इस खुलासे के बाद कानपुर के कई प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले आम खरीदारों की नींद उड़ गई है। जांच के दायरे में आने वाले प्रोजेक्ट्स की रजिस्ट्रियां रद्द हो सकती हैं या उन पर 'स्टे' लग सकता है।

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