बिहार में नौकरशाही का बड़ा रिसेट संजीव हंस और कमिश्नरों का तबादला

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति जितनी खबरों में रहती है, वहां के अफसरों के तबादले भी उतनी ही चर्चा बटोरते हैं। आज यानी 30 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार ने आईएएस (IAS) अधिकारियों की एक नई लिस्ट जारी की है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। यह केवल एक नियमित फेरबदल नहीं है, बल्कि सरकार की आने वाले समय के लिए एक खास कूटनीति मानी जा रही है।

संजीव हंस का बदला ठिकाना
इस लिस्ट में सबसे चर्चित नाम आईएएस संजीव हंस का है। उन्हें अब 'बोर्ड ऑफ रेवेन्यू' (राजस्व परिषद) में तैनात किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले कुछ समय से वे कई चर्चाओं और विवादों का हिस्सा रहे थे। ऐसे में उन्हें एक 'ठंडे बस्ते' वाले विभाग या मुख्य धारा से अलग जिम्मेदारी देना, सरकार की ओर से एक सख्त संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। राजस्व परिषद को आमतौर पर बड़े अफसरों के लिए ऐसी जगह माना जाता है जहां उनके पास पुरानी शक्ति (Dynamic Power) वैसी नहीं रहती।

चार प्रमंडलों को मिले नए 'कमिश्नर'
सिर्फ एक या दो चेहरे नहीं, बल्कि बिहार के चार महत्वपूर्ण प्रमंडलों (Divisions) में नए कमिश्नर यानी प्रमंडलीय आयुक्त तैनात किए गए हैं। सरकार ने इस बार अनुभव और पुराने प्रदर्शन को ध्यान में रखकर फील्ड में कड़क अफसरों को उतारने की कोशिश की है। इन नए नियुक्त आयुक्तों के ऊपर कानून-व्यवस्था को सुधारने और विकास कार्यों में तेज़ी लाने की एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।

तबादले की असली वजह क्या है?
देखा जाए तो 2026 की ओर कदम बढ़ाने से पहले राज्य सरकार प्रशासन में कसावट लाना चाहती है। साल के आखिरी दिनों में अफसरों को यहां-वहां करने के पीछे दो बड़े मकसद हो सकते हैं: पहला, जो अफसर एक ही जगह लंबे समय से जमे थे, उन्हें बदला जाए; और दूसरा, भ्रष्टाचार या सुस्ती के आरोपों से घिरे चेहरों को हटाकर छवि साफ रखी जाए।

यह तबादला एक्सप्रेस उन अफसरों के लिए भी एक सबक है जो काम की जगह सिर्फ कुर्सियां गर्म कर रहे थे। नीतीश सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि काम के प्रति लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले कुछ दिनों में इसके नतीजे जमीनी स्तर पर देखने को मिल सकते हैं कि आखिर इन नए 'महारथियों' ने अपनी तैनाती के बाद सिस्टम को कितना बदला।