केंद्रीय कर्मचारियों और हमारे पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी खबर इलाज के रेट बदल गए हैं, अब मिलेगी बेहतर सुविधा

Post

News India Live, Digital Desk : बीमारी बताकर नहीं आती, और जब आती है तो सबसे बड़ा डर यह नहीं होता कि "बीमारी क्या है", बल्कि यह होता है कि "इलाज में खर्चा और परेशानी कितनी होगी?" अगर आप या आपके घर में कोई केंद्र सरकार का कर्मचारी (Central Govt Employee) है या कोई रक्षा क्षेत्र से रिटायर्ड (Ex-Serviceman) है, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है।

केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक अहम फैसला लिया है, जिसका सीधा असर CGHS (Central Government Health Scheme) और ECHS (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) के लाभार्थियों पर पड़ने वाला है। सरकार ने इन योजनाओं के तहत इलाज की दरों (Rates) को संशोधित (Revise) कर दिया है।

आखिर यह माजरा क्या है?

इसे आसान भाषा में समझते हैं। होता यह था कि सरकार ने बीमारियों के इलाज और अस्पताल के खर्च के लिए पुराने रेट तय कर रखे थे। महंगाई बढ़ने के कारण प्राइवेट अस्पताल उन पुराने रेट्स पर इलाज करने में आनाकानी करते थे या मना कर देते थे। इससे सबसे ज्यादा परेशानी हमारे बुज़ुर्ग पेंशनर्स और पूर्व सैनिकों को होती थी। उन्हें अच्छे अस्पतालों में कैशलेस इलाज मिलने में दिक्कत आती थी।

ECHS वालों को कैसे मिलेगा फायदा?

ताज़ा अपडेट के मुताबिक, सरकार ने अब ECHS लाभार्थियों के लिए भी CGHS के संशोधित पैकेज दरों (Revised Rates) को मंजूरी दे दी है।

  1. हस्पताल मना नहीं करेंगे: चूंकि अब सरकार अस्पतालों को इलाज के बदले नई और बेहतर दरों पर भुगतान करेगी, इसलिए पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पताल मरीजों को भर्ती करने से इनकार नहीं कर पाएंगे।
  2. बेहतर सुविधाएं: जब रेट अच्छे मिलते हैं, तो अस्पताल सर्विस भी अच्छी देते हैं। इसका मतलब है कि अब लाइन में लगने या 'रेफर' करवाने के झंझट कम होंगे।

इनको मिली है हरी झंडी

रक्षा मंत्रालय के पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने आदेश जारी कर दिया है कि नई CGHS दरें ECHS पैनल वाले सभी अस्पतालों पर भी लागू होंगी। यह उन लाखों परिवारों के लिए राहत की सांस है जो अपनी स्वास्थ्य ज़रूरतों के लिए पूरी तरह से इसी स्कीम पर निर्भर हैं।

किन चीज़ों के रेट बदले?

हालांकि पूरी लिस्ट काफी लंबी होती है, लेकिन मुख्य रूप से डॉक्टर की कंसल्टेशन फीस, आईसीयू (ICU) चार्ज और कमरे के किराये (Room Rent) जैसी चीजों में बदलाव अक्सर समय-समय पर किए जाते हैं ताकि वे आज की महंगाई के हिसाब से सही हों।