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April 25 2026 03:35 am

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा भूचाल चुनाव से पहले पूर्व CM ओ. पन्नीरसेल्वम DMK में होंगे शामिल

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News India Live, Digital Desk : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (Tamil Nadu Assembly Election 2026) से ठीक पहले राज्य की सियासत में एक बेहद चौंकाने वाला उलटफेर देखने को मिल रहा है। अन्नाद्रमुक (AIADMK) से निष्कासित दिग्गज नेता और राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके ओ. पन्नीरसेल्वम (O Panneerselvam - OPS) अब अपने धुर विरोधी दल DMK का दामन थामने जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वे मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (MK Stalin) की मौजूदगी में आधिकारिक तौर पर सत्ताधारी पार्टी का झंडा थामेंगे।

स्टालिन के नेतृत्व में नई शुरुआत

सियासी गलियारों में यह खबर आग की तरह फैल गई है। माना जा रहा है कि अपनी पुरानी पार्टी AIADMK में सम्मानजनक वापसी की सभी उम्मीदें खत्म होने के बाद, ओपीएस ने यह अहम कदम उठाया है। वे डीएमके मुख्यालय 'अन्ना अरिवालयम' (Anna Arivalayam) में पार्टी प्रमुख एम.के. स्टालिन के सामने सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस बड़े राजनीतिक शिफ्ट की पटकथा तब ही लिखनी शुरू हो गई थी, जब हाल ही में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले विधायक आर. वैथिलिंगम और पॉल मनोज पांडियन ने इस्तीफा देकर DMK का हाथ थाम लिया था।

क्या बोडिनायक्कनूर से मिलेगा चुनावी टिकट?

DMK में शामिल होने की खबरों के साथ ही ओपीएस की नई भूमिका पर भी चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, DMK उन्हें आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव में 'बोडिनायक्कनूर' (Bodinayakkanur) या थेनी जिले की किसी अन्य सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है। गौरतलब है कि साल 2021 के चुनावों में उन्होंने बोडिनायक्कनूर से ही शानदार जीत दर्ज की थी।

AIADMK से निष्कासन और NDA से दूरी का सफर

पन्नीरसेल्वम का हालिया राजनीतिक सफर बड़े संघर्षों भरा रहा है:

EPS से वर्चस्व की लड़ाई: जुलाई 2022 में AIADMK के भीतर चले लंबे सत्ता संघर्ष के बाद, एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने पार्टी के नियमों में संशोधन कर पन्नीरसेल्वम को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

NDA से भी तोड़ा था नाता: चुनाव आयोग और कोर्ट के चक्कर काटने के बाद, पिछले साल अगस्त में ओपीएस ने बीजेपी नीत एनडीए (NDA) गठबंधन से भी खुद को यह कहते हुए अलग कर लिया था कि उन्हें वहां "अपमान" सहना पड़ रहा है।

अमित शाह की वह अहम सलाह: ओपीएस ने हाल ही में खुलासा किया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें आगाह किया था कि एक बंटी हुई AIADMK के खिलाफ DMK गठबंधन को हराना नामुमकिन है। ओपीएस ने शाह से AIADMK गुटों को एकजुट करने की गुहार भी लगाई थी, लेकिन EPS के न मानने के कारण बात नहीं बन पाई।

क्यों लेना पड़ा अपने ही 'मूल घर' के खिलाफ फैसला?

पन्नीरसेल्वम के करीबियों का कहना है कि यह फैसला रातों-रात नहीं लिया गया है। पलानीस्वामी को सीधी चुनौती देने और अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए उन्हें DMK जैसी ताकतवर पार्टी के साथ जुड़ना जरूरी लगा। दक्षिण तमिलनाडु के मुक्कुलथोर (Mukkulathor) समुदाय में ओपीएस की गहरी पैठ मानी जाती है। अब उनके इस कदम से 2026 के चुनावों में DMK को इस वोट बैंक का सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।