झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला बच्चों से विवाद होने पर बुजुर्गों को घर से नहीं निकाला जा सकता,जानें क्या हैं कानूनी अधिकार
News India Live, Digital Desk : पारिवारिक कलह और बच्चों द्वारा बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करने के बढ़ते मामलों पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी है कि माता-पिता को अपने घर में शांति से रहने का पूर्ण अधिकार है, और यदि बच्चे उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं, तो उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है, न कि बुजुर्गों को।
कोर्ट के फैसले की 5 बड़ी बातें
बुजुर्गों का घर पर अधिकार: अदालत ने कहा कि जिस घर को माता-पिता ने अपनी कमाई से बनाया या खरीदा है, उस पर उनका प्राथमिक अधिकार है। बच्चों का वहां रहना माता-पिता की अनुमति और उनके स्नेह पर निर्भर करता है, यह उनका कानूनी हक नहीं है।
प्रताड़ना पर बेदखली: यदि बच्चे (बेटा या बहू) बुजुर्गों को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं, तो माता-पिता प्रशासन या कोर्ट की मदद से उन्हें घर से बाहर निकाल सकते हैं।
भरण-पोषण (Maintenance): कोर्ट ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007' का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों का यह कानूनी कर्तव्य है कि वे अपने माता-पिता की देखभाल करें।
शांतिपूर्ण जीवन का अधिकार: अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत बुजुर्गों को गरिमा और शांति के साथ जीने का अधिकार है। पारिवारिक विवाद इसकी राह में बाधा नहीं बन सकते।
प्रशासन की जिम्मेदारी: हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और पुलिस को भी निर्देश दिया है कि बुजुर्गों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें अपने ही घर में असुरक्षित महसूस न हो।
किस मामले में आया यह फैसला?
यह फैसला एक ऐसी याचिका पर आया जिसमें एक बुजुर्ग पिता ने अपने बेटे और बहू द्वारा की जा रही प्रताड़ना के खिलाफ गुहार लगाई थी। बेटे का दावा था कि पैतृक संपत्ति होने के कारण उसे वहां रहने का हक है। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि संपत्ति के अधिकार से ऊपर माता-पिता का सम्मान और सुरक्षा है।
बुजुर्गों के लिए क्या है कानूनी उपाय?
अगर किसी बुजुर्ग को उनके बच्चे परेशान कर रहे हैं, तो वे ये कदम उठा सकते हैं:
ट्रिब्यूनल में शिकायत: हर जिले में 'मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल' होता है, जहाँ वकील के बिना भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
बेदखली का आवेदन: यदि घर बुजुर्ग के नाम पर है, तो वे बच्चों को बेदखल करने के लिए जिलाधिकारी (DM) या संबंधित फोरम में आवेदन कर सकते हैं।