Punjab Politics : सुखबीर सिंह बादल को अदालत से बड़ी राहत, पेशी से मिली छूट, जानें क्या है 8 साल पुराना यह मामला

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News India Live, Digital Desk : सोमवार (16 फरवरी 2026) को चंडीगढ़ की जिला अदालत में सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने बादल की ओर से पेश की गई 'व्यक्तिगत पेशी से छूट' (Exemption from Personal Appearance) की अर्जी को स्वीकार कर लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी 2026 को होगी।

आज कोर्ट में क्या हुआ? (16 फरवरी 2026)

छूट की अर्जी: सुखबीर बादल के वकील राजेश कुमार राय ने अदालत में अर्जी दाखिल कर बताया कि बादल गांव में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक है, जिसमें पंजाब के विभिन्न हिस्सों से आए वरिष्ठ नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति अनिवार्य है।

अदालत का फैसला: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) ने दलीलों को स्वीकार करते हुए उन्हें आज के लिए पेशी से छूट दे दी। हालांकि, बादल ने अदालत को वचन दिया है कि वे अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे।

पिछला घटनाक्रम: इससे पहले, जनवरी 2026 में अदालत में पेश न होने के कारण बादल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे, जिसके बाद उन्होंने 17 जनवरी 2026 को सरेंडर कर 20,000 रुपये के बॉन्ड पर जमानत प्राप्त की थी।

क्या है पूरा विवाद? (The Case Background)

यह मामला लगभग 8 साल पुराना है:

शिकायतकर्ता: यह केस धार्मिक संगठन 'अखंड कीर्तनी जत्था' के प्रवक्ता राजिंदर पाल सिंह ने जनवरी 2017 में दर्ज कराया था।

विवादित बयान: आरोप है कि 2017 के चुनाव प्रचार के दौरान सुखबीर बादल ने राजिंदर पाल सिंह और उनके संगठन को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'बब्बर खालसा इंटरनेशनल' (BKI) का राजनैतिक चेहरा बताया था।

ट्रिगर: यह बयान तब आया था जब दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजिंदर पाल सिंह के आवास पर मुलाकात की थी।

मानहानि का दावा: राजिंदर पाल सिंह का तर्क है कि बादल के इस झूठे आरोप से उनकी और उनके संगठन की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा नुकसान पहुँचा है।

कानूनी स्थिति

सुखबीर बादल ने इस शिकायत को रद्द कराने के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद निचली अदालत में ट्रायल फिर से शुरू हुआ है।