कानपुर के अस्पतालों में LPG का बड़ा संकट, उर्सला में आज भर की गैस, हैलट में भी 5 दिन का स्टॉक
News India Live, Digital Desk: कानपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ मरीजों और तीमारदारों की बुनियादी जरूरतों पर संकट खड़ा कर दिया है। शहर के उर्सला, हैलट और GSVM मेडिकल कॉलेज की मेस में अब खाना पकाने के लिए गैस की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे अस्पताल प्रशासन और मेस संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है।
अस्पतालों की वर्तमान स्थिति: कहां कितनी गैस बची?
शहर के तीन बड़े चिकित्सा संस्थानों में गैस का स्टॉक खतरनाक स्तर तक नीचे गिर गया है:
| अस्पताल का नाम | वर्तमान स्थिति (गैस स्टॉक) | मरीजों/छात्रों की संख्या |
|---|---|---|
| उर्सला अस्पताल (Ursula) | केवल शुक्रवार शाम (आज) तक की गैस। | हजारों मरीज और तीमारदार। |
| हैलट अस्पताल (Hallet) | मात्र 5 दिन का स्टॉक बचा है। | एक समय में 450 लोगों का खाना। |
| GSVM मेडिकल कॉलेज | महज 2 दिन का इंतजाम। | 1200 मेडिकल छात्र-छात्राएं। |
बैकअप प्लान: 'डीजल भट्टी' और 'बिजली' का सहारा
गैस संकट गहराता देख मेस संचालकों ने मरीजों का खाना जारी रखने के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है:
डीजल भट्टी और कोयला: हैलट और मेडिकल कॉलेज के संचालकों ने स्पष्ट किया है कि गैस खत्म होने पर वे डीजल भट्टी, कोयला या लकड़ी का उपयोग करेंगे।
इलेक्ट्रिक मशीनें: रोटियां बनाने के लिए पहले से ही हैलट जैसे अस्पतालों में बिजली से चलने वाली मशीनें लगी हैं, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
पूरी दुनिया और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में इस समय रसोई गैस की आपूर्ति बाधित है। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित होने की अफवाहों और जमाखोरी ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि अस्पतालों और स्कूलों को सिलेंडर देने में प्राथमिकता (Priority) दी जाएगी।
प्रशासन और सरकार का रुख
DM के निर्देश: कानपुर जिलाधिकारी ने गैस कंपनियों को सख्त आदेश दिए हैं कि अस्पतालों की आपूर्ति किसी भी कीमत पर रुकनी नहीं चाहिए।
सीएम योगी की सख्ती: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ रासुका (NSA) तक लगाने के संकेत दिए हैं।