Big change in cricket:अब गर्दन, सिर या गले में चोट लगने पर भी मिलेगा नया खिलाड़ी! BCCI ने लागू किया यह क्रांतिकारी नियम
Big change in cricket: क्रिकेट, जिसे जेंटलमैन का खेल कहा जाता है, शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा भी है। मैदान पर खिलाड़ियों को अक्सर गंभीर चोटों का सामना करना पड़ता है, जो न केवल उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं, बल्कि कभी-कभी उनका पूरा करियर भी दांव पर लगा देती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों की सुरक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
अब से, भारत के घरेलू क्रिकेट सीजन में, 'कंकशन रिप्लेसमेंट' (Concussion Replacement) नियम के दायरे को और बढ़ा दिया गया है। इस नए नियम के तहत, अगर किसी खिलाड़ी को मैच के दौरान सिर, गर्दन या गले (neck and cervical spine) पर गंभीर चोट लगती है, तो उसकी टीम को एक 'रिप्लेसमेंट' खिलाड़ी मैदान में उतारने की अनुमति होगी।
क्या था 'कंकशन रिप्लेसमेंट' का पुराना नियम?
इससे पहले, यह नियम सिर्फ कंकशन के मामलों में ही लागू होता था। कंकशन का मतलब है सिर पर गेंद लगने या टकराने से दिमाग पर लगने वाली अंदरूनी चोट। इस नियम के तहत, अगर कोई खिलाड़ी कंकशन का शिकार हो जाता था, तो डॉक्टर की सलाह पर उसकी जगह एक 'लाइक-फॉर-लाइक' (like-for-like) यानी उसी तरह का खिलाड़ी (बल्लेबाज की जगह बल्लेबाज, गेंदबाज की जगह गेंदबाज) ले सकता था। ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ की जगह मार्नस लाबुशेन का एशेज में रिप्लेसमेंट लेना इसका सबसे बड़ा उदाहरण था।
इस बड़े बदलाव की ज़रूरत क्यों पड़ी? (ऋषभ पंत की चोट ने खोला रास्ता)
इस नियम के विस्तार के पीछे की प्रेरणा हाल के दिनों में खिलाड़ियों को लगी कुछ गंभीर चोटें हैं। हालांकि BCCI ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) के भयानक कार एक्सीडेंट और उसके बाद उनके करियर पर आए संकट ने बोर्ड को इस बारे में गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया।
पंत की चोट भले ही मैदान पर नहीं लगी थी, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी की चोटें कितनी गंभीर हो सकती हैं और उनसे उबरने में कितना समय लग सकता है। मैदान पर भी अक्सर फील्डिंग के दौरान या गेंद लगने से खिलाड़ियों को इस तरह की चोटें लगती रही हैं, लेकिन कंकशन न होने की स्थिति में टीमों को 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेलना पड़ता था।
क्या है BCCI का नया नियम?
BCCI के नए प्लेइंग कंडीशंस के अनुसार, घरेलू मैचों के दौरान (जैसे रणजी ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी आदि):
- अगर किसी खिलाड़ी को मैदान पर बाहरी चोट के कारण सिर, गर्दन या रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से में कोई गंभीर चोट लगती है।
- और मैच डॉक्टर यह प्रमाणित करता है कि वह खिलाड़ी मैच में आगे हिस्सा लेने के लिए फिट नहीं है।
- तो, टीम मैच रेफरी की अनुमति से एक रिप्लेसमेंट खिलाड़ी का अनुरोध कर सकती है।
यह नियम सुनिश्चित करेगा कि टीम को एक खिलाड़ी की दुर्भाग्यपूर्ण चोट का खामियाजा न भुगतना पड़े और खेल की प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
कैसे होगा लागू और क्या हैं शर्तें?
- 'लाइक-फॉर-लाइक' रिप्लेसमेंट: कंकशन नियम की तरह ही, यहां भी रिप्लेसमेंट 'लाइक-फॉर-लाइक' ही होगा। एक विशेषज्ञ बल्लेबाज की जगह एक विशेषज्ञ बल्लेबाज ही आ सकता है।
- अंपायर और रेफरी का निर्णय अंतिम: खिलाड़ी को रिप्लेसमेंट देने का अंतिम निर्णय मैच रेफरी का होगा, जो टीम डॉक्टर की रिपोर्ट और चोट की गंभीरता का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।
- बल्लेबाजी और गेंदबाजी की शर्तें: यदि चोटिल खिलाड़ी ने पारी में बल्लेबाजी या गेंदबाजी कर ली है, तो रिप्लेसमेंट खिलाड़ी उस पारी में दोबारा बल्लेबाजी या गेंदबाजी नहीं कर पाएगा।
BCCI का यह प्रगतिशील कदम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है ताकि इस नियम को वैश्विक स्तर पर भी लागू किया जा सके। यह फैसला 'खिलाड़ियों की सुरक्षा पहले' (Player Safety First) की नीति को और मजबूत करता है और यह सुनिश्चित करता है कि क्रिकेट का मैदान टैलेंट दिखाने की जगह बना रहे, न कि गंभीर चोटों का अखाड़ा।