BHU 105th Convocation : काशी में ज्ञान का महाकुंभ डॉ. वी.के. सारस्वत की मौजूदगी में छात्रों को मिली मेहनत की
News India Live, Digital Desk : काशी, जिसे विद्या और संस्कृति की नगरी कहा जाता है, वहां आज एक अलग ही उल्लास देखने को मिला। मौका था बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के 105वें दीक्षांत समारोह का। कल्पना कीजिए, वो ऐतिहासिक कैंपस, पारंपरिक वेशभूषा, सिर पर साफा और हाथ में डिग्री... किसी भी छात्र के लिए इससे बड़ा और भावुक पल क्या हो सकता है?
आज बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में वही नजारा देखने को मिला, जब मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया और उन्हें जीवन की नई उड़ान भरने के लिए पंख मिले। आइए, आसान शब्दों में जानते हैं कि आज के समारोह में क्या खास रहा और मुख्य अतिथि ने युवाओं को क्या सीख दी।
1. विज्ञान और ज्ञान का संगम: मुख्य अतिथि डॉ. वी.के. सारस्वत
इस भव्य समारोह की शोभा बढ़ाई डॉ. विजय कुमार सारस्वत (Dr. V.K. Saraswat) ने, जो नीति आयोग के सदस्य हैं और देश के जाने-माने वैज्ञानिक हैं। रक्षा अनुसंधान (DRDO) के पूर्व प्रमुख के तौर पर उन्होंने देश को मिसाइल तकनीक में ताकतवर बनाया है। ऐसे दिग्गज का छात्रों के बीच होना ही अपने आप में प्रेरणा की बात थी। उन्होंने अपने संबोधन में छात्रों से कहा कि "डिग्री सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है देश को आगे ले जाने की।"
2. परंपरा और आधुनिकता की झलक
बीएचयू के दीक्षांत समारोह की सबसे खास बात वहां की परंपरा है। यहाँ काले गाउन की जगह भारतीय पारंपरिक परिधान और महामना मदन मोहन मालवीय जी की पहचान 'पगड़ी' (साफा) का महत्व है। जब छात्र और प्रोफेसर इस वेशभूषा में जुलूस (Academic Procession) की शक्ल में निकलते हैं, तो लगता है जैसे हम भारतीय संस्कृति की जड़ों को देख रहे हों। आज भी वह दृश्य हर किसी का मन मोह रहा था।
3. गोल्ड मेडल की चमक और माता-पिता के आंसू
समारोह का सबसे भावुक हिस्सा वह था जब टॉपर छात्रों को मंच पर बुलाकर 'गोल्ड मेडल' से नवाजा गया। कई माता-पिता की आँखों में खुशी के आंसू थे। ये मेडल सिर्फ धातु के टुकड़े नहीं थे, बल्कि सालों की कड़ी मेहनत और रातों की जगी हुई नींद का फल थे। मंच से छात्रों को शोध (Research) और नवाचार (Innovation) पर ध्यान देने की सलाह दी गई, ताकि भारत दुनिया का नेतृत्व कर सके।
4. युवाओं को मिला 'सफलता का मंत्र'
डॉ. सारस्वत ने युवाओं को बदलते भारत की तस्वीर दिखाई। उन्होंने तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आगे बढ़ने पर जोर दिया। उनका संदेश साफ़ था अब हमें नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला (Job Creators) बनना है। उन्होंने कहा कि बीएचयू से निकला छात्र न केवल एक अच्छा प्रोफेशनल बने, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बने।
5. कुलपति का संदेश
कुलपति (Vice-Chancellor) और विश्वविद्यालय प्रशासन ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया और साल भर की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने बताया कि कैसे बीएचयू वैश्विक रैंकिंग में अपनी जगह और मजबूत कर रहा है।