Bhog Recipe : माँ कात्यायनी को बेहद प्रिय है शहद का भोग नवरात्रि के छठे दिन घर पर झटपट बनाएं हनी हलवा
News India Live, Digital Desk : चैत्र नवरात्रि के छठे दिन शक्ति के छठे स्वरूप 'माँ कात्यायनी' की उपासना की जाती है। माँ कात्यायनी को महर्षि कात्यायन की पुत्री और ब्रज की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माँ कात्यायनी को शहद (Honey) का भोग अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि आज के दिन माँ को शहद अर्पित करने से साधक के जीवन से दरिद्रता दूर होती है और विवाह में आ रही समस्त बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। यदि आप भी माँ को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो बाजार के मिलावटी प्रसाद के बजाय घर पर शुद्धता के साथ 'शहद का हलवा' तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसे बनाने की सबसे आसान विधि।
शहद का हलवा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
माँ के भोग के लिए सात्विकता का ध्यान रखना अनिवार्य है। इसके लिए आपको चाहिए:
एक कप सूजी (रवा)
आधा कप शुद्ध देसी घी
आधा कप शहद (शुद्ध और प्राकृतिक)
दो कप गुनगुना पानी
बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स (बादाम, काजू, पिस्ता)
आधा चम्मच इलायची पाउडर
केसर के कुछ धागे (विकल्पानुसार)
बनाने की विधि: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
सूजी की भुनाई: सबसे पहले एक कड़ाही में देसी घी गरम करें। अब इसमें सूजी डालें और धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उसका रंग हल्का सुनहरा (Golden Brown) न हो जाए और उससे भीनी-भीनी खुशबू न आने लगे।
पानी का मिश्रण: भुनी हुई सूजी में धीरे-धीरे गुनगुना पानी डालें। ध्यान रहे कि गुठलियां (Lumps) न पड़ें, इसलिए इसे लगातार चलाते रहें। इसी समय इसमें केसर के धागे भी डाल दें।
शहद का प्रयोग: जब सूजी पानी सोख ले और गाढ़ी होने लगे, तब गैस की आंच एकदम धीमी कर दें। अब इसमें चीनी के स्थान पर आधा कप शहद मिलाएं। शहद को अंत में डालने से उसके पोषक तत्व और प्राकृतिक स्वाद बरकरार रहता है।
ड्राई फ्रूट्स का तड़का: हलवे में इलायची पाउडर और कटे हुए मेवे डालकर अच्छी तरह मिलाएं। जब हलवा कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे और घी अलग दिखने लगे, तो समझ लीजिए कि भोग तैयार है।
माँ कात्यायनी की पूजा और भोग लगाने का नियम
शाम के समय गोधूलि बेला में माँ कात्यायनी की आरती करें और तैयार हलवे को चांदी या कांसे के बर्तन में रखकर माँ को अर्पित करें। भोग लगाते समय "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः" मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद इस प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटें। विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं को यह प्रसाद खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
शहद के भोग का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
शहद को आयुर्वेद में 'अमृत' तुल्य माना गया है। यह शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक है। माँ कात्यायनी संघर्ष और विजय की देवी हैं, और शहद का मीठा व कसैला स्वाद जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। आध्यात्मिक रूप से शहद चढ़ाने से वाणी में मधुरता आती है और व्यक्तित्व में निखार आता है।