Bharat Bandh : 1 फरवरी को भारत बंद का आह्वान UGC के नए नियमों और आरक्षण विवाद को लेकर संगठनों ने खोला मोर्चा
News India Live, Digital Desk : देश में एक बार फिर 'भारत बंद' की गूंज सुनाई देने वाली है। विभिन्न सामाजिक और छात्र संगठनों, जिनमें करणी सेना और कई सामान्य वर्ग के संगठन शामिल हैं, ने आगामी 1 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। यह विरोध मुख्य रूप से UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए इक्विटी रेगुलेशन 2026 के खिलाफ है, जिसे लेकर प्रदर्शनकारी इसे 'विभाजनकारी' बता रहे हैं।
क्यों बुलाया गया है 'भारत बंद'? (The Real Reasons)
इस बंद के पीछे दो बड़े मुद्दे हैं जो वर्तमान में देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श के केंद्र में हैं:
UGC के नए नियम (Section 3C): प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूजीसी के नए नियमों में केवल SC, ST और OBC छात्रों को भेदभाव से सुरक्षा दी गई है, जबकि 'सामान्य वर्ग' के छात्रों को इससे बाहर रखा गया है। इसे वे 'शिक्षा में असमानता' करार दे रहे हैं।
श्रम कानून और अन्य मुद्दे: जहाँ 1 फरवरी को सामाजिक संगठन सक्रिय हैं, वहीं 10 केंद्रीय श्रमिक संघों ने भी फरवरी के महीने में (विशेषकर 12 फरवरी) एक बड़ी हड़ताल की घोषणा की है। हालांकि, 1 फरवरी के बंद का मुख्य चेहरा 'छात्र और सामाजिक संगठन' हैं।
किसने दिया है 'बंद' का आह्वान?
करणी सेना: राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस संगठन ने 1 फरवरी को बंद को सफल बनाने के लिए कमर कस ली है।
छात्र संगठन: कई विश्वविद्यालयों के छात्र संघों ने इस बंद को अपना समर्थन दिया है।
सामान्य वर्ग महासंघ: विभिन्न राज्यों के सवर्ण और सामान्य वर्ग संगठनों ने भी इसमें शामिल होने की घोषणा की है।
क्या रहेगा असर? (What to Expect)
चूंकि 1 फरवरी 2026 को रविवार है, इसलिए इसका असर मिला-जुला रहने की संभावना है:
| क्षेत्र | स्थिति (Status) |
|---|---|
| बैंक | रविवार होने के कारण पहले से ही बंद रहेंगे। |
| शिक्षण संस्थान | अवकाश रहेगा, लेकिन परीक्षाओं पर असर पड़ सकता है। |
| परिवहन | राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में 'चक्का जाम' की चेतावनी दी गई है। |
| बाजार | आवश्यक सेवाओं (दवाई, दूध) को छोड़कर व्यापारिक संगठनों ने सहयोग की अपील की है। |
प्रशासन की तैयारी: चप्पे-चप्पे पर पहरा
बंद की घोषणा को देखते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
धारा 144: संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लगाने पर विचार किया जा रहा है।
रेलवे सुरक्षा: स्टेशनों और पटरियों की सुरक्षा के लिए जीआरपी (GRP) को तैनात किया गया है ताकि 'रेल रोको' जैसे प्रदर्शनों को रोका जा सके।
सरकार का पक्ष
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी के नियम किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि ये केवल हाशिए पर मौजूद वर्गों को सुरक्षा देने के लिए हैं। सरकार ने लोगों से किसी भी प्रकार की 'गलतफहमी' (Misconception) में न आने और शांति बनाए रखने की अपील की है।