भगवंत मान को अपनों ने ही दिया झटका सीएम के वो पूर्व खास अब थामने जा रहे हैं भाजपा का दामन

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News India Live, Digital Desk : पंजाब की राजनीति में हलचल कभी शांत नहीं होती। कभी मंत्रियों के इस्तीफे, तो कभी पुरानी पार्टी छोड़कर नए खेमे में जाना यहाँ की फिज़ाओं में आम है। लेकिन ताज़ा मामला थोड़ा अलग है क्योंकि ये सीधा मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO से जुड़ा हुआ है।

खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ लंबे समय तक काम कर चुके उनके पूर्व OSD (ऑफीसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) अब अपनी नई राजनीतिक पारी बीजेपी के साथ शुरू करने जा रहे हैं।

कौन हैं ये और ये चर्चा इतनी बड़ी क्यों है?
देखा जाए तो एक ओएसडी केवल एक अधिकारी नहीं होता, वह मुख्यमंत्री का आंख और कान माना जाता है। सरकार के फैसले, सीएम की रणनीति और पार्टी के अंदरूनी मामलों में उनकी सीधी पकड़ होती है। ऐसे में किसी ऐसे व्यक्ति का मुख्यमंत्री का साथ छोड़ना और विपक्षी दल (बीजेपी) में जाना आम बात नहीं है। यह न केवल आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक रणनीतिक झटका है, बल्कि मान के लिए एक भावनात्मक झटका भी हो सकता है।

क्यों बदल रही हैं राहें?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि पिछले कुछ समय से 'आप' के अंदरूनी घेरे में काफी कुछ बदल रहा है। पुराने साथियों का दूर जाना इस बात का संकेत है कि या तो विचारों का तालमेल नहीं बैठ रहा या फिर पंजाब में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़े मोहरों पर दांव लगा रही है। बीजेपी पंजाब में अपनी ज़मीन तलाशने के लिए उन चेहरों को पसंद कर रही है जिनके पास मौजूदा सरकार के काम करने के तरीके की अंदरूनी जानकारी हो।

बीजेपी का क्या है गेमप्लान?
भाजपा पिछले कुछ समय से पंजाब में काफी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। उसे ऐसे स्थानीय और प्रभावी चेहरों की ज़रूरत है जो पंजाब की ज़मीनी राजनीति को समझते हों। भगवंत मान के पूर्व ओएसडी का पार्टी में शामिल होना यह दिखाता है कि बीजेपी पंजाब की सत्ता के सबसे ऊपरी पायदान पर नज़र गड़ाए हुए है।

पंजाब की जनता पर क्या असर पड़ेगा?
आम जनता के लिए ये खबर भले ही एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाने जैसी हो, लेकिन पंजाब की सत्ता पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। विपक्ष अब मुख्यमंत्री को घेरने के लिए उन्हीं के पूर्व साथियों की जानकारियों और तजुर्बों का सहारा लेगा।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री मान अपने पुराने साथी के जाने पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आम आदमी पार्टी इस 'अंदरूनी डेंट' को कैसे ठीक करती है।

आपको क्या लगता है, क्या अपनों का इस तरह साथ छोड़ना पंजाब सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है? कमेंट में अपनी राय हमारे साथ शेयर करें