Bangladesh Election : बीएनपी की बंपर जीत, लेकिन जमात-ए-इस्लामी के भारत विरोधी तेवर ने बढ़ाई दिल्ली की टेंशन

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News India Live, Digital Desk: पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है। हालिया चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। हालांकि, इस जीत के साथ ही भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सबसे बड़ी चिंता जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) के उन बयानों को लेकर है, जिनमें 'भारत' का जिक्र एक खास संदर्भ में किया गया है।

BNP की 'लैंडस्लाइड' विक्ट्री: क्या बदलेगा समीकरण?

लंबे समय तक विपक्ष में रहने के बाद खालिदा जिया की पार्टी BNP ने सत्ता की चाबी हासिल कर ली है। शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बने अस्थिर माहौल के बीच यह चुनाव परिणाम ऐतिहासिक माना जा रहा है।

सत्ता परिवर्तन: अवामी लीग के लंबे शासन के बाद अब बांग्लादेश एक नए युग में प्रवेश कर रहा है।

लोकप्रियता: जनता ने भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे मुद्दों पर BNP को अपना समर्थन दिया है।

जमात-ए-इस्लामी और भारत की चिंता

BNP की जीत के साथ ही उसकी सहयोगी मानी जाने वाली कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भी अपनी ताकत दिखाई है। जमात के नेताओं ने हालिया बयानों में भारत के साथ पिछले समझौतों और 'हस्तक्षेप' पर सवाल उठाए हैं।

भारत विरोधी रुख: जमात के नेताओं का कहना है कि वे किसी भी देश का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।

सुरक्षा चुनौतियां: भारत के लिए चिंता की बात यह है कि अगर बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए हुआ, तो पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

दिल्ली के लिए क्या हैं चुनौतियां?

भारत हमेशा से बांग्लादेश का एक विश्वसनीय साझेदार रहा है। शेख हसीना के दौर में दोनों देशों के संबंध ऊंचाइयों पर थे, लेकिन अब:

कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स: क्या भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे रेल और रोड प्रोजेक्ट्स जारी रहेंगे?

चीन का प्रभाव: क्या नई सरकार का झुकाव चीन की तरफ बढ़ेगा?

हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: नई सरकार के तहत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भारत के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है