Baghera Village : छत्तीसगढ़ का कुत्ता मंदिर जहाँ भगवान की नहीं कुत्तों की होती है पूजा जाने पूरी कहानी

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Newsindia live,Digital Desk: हमारे देश भारत में भगवान और भक्ति की अनूठी और पवित्र प्रथा है भारत में लोग अलग अलग रूप में भगवान को पूजते हैं कुछ अनोखे तरीके से अपने इष्टदेव को पूजते हैं उनमें से ही एक है दुर्ग का यह अनोखा कुत्ता मंदिर जो अपने आप में एक अलग और महत्वपूर्ण धार्मिक महत्व रखता है यह छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के बघेरा गाँव में स्थित है

छत्तीसगढ़ में इस कुत्ता मंदिर में विशेष रूप से भगवान श्री रामचंद्र के सबसे भक्त हनुमान जी को कुत्तों के रूप में समर्पित किया गया है इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में आस्था और भक्ति रहती है स्थानीय लोग और दूर दूर से आए भक्त इस मंदिर में दर्शन करने और अपनी मन्नत पूरी करने के लिए आते हैं यह एक ऐसा मंदिर है जहां देवताओं की पूजा पालतू जानवरों के प्रति आस्था और प्रेम को बढ़ावा देने का एक तरीका बन गया है

इस अनोखे मंदिर का निर्माण किसी राजा महाराजा ने नहीं बल्कि ग्रामीणों ने मिलकर करवाया था ग्राम पंचायत के सदस्य ग्रामीण और समाजसेवी इस मंदिर के निर्माण कार्य में सक्रिय रहे उन्होंने गांव वालों की सामूहिक सहभागिता से मंदिर बनवाया गाँव के मुख्य लोग इस अनोखे प्रयास में सहयोग करते रहे इससे गाँव वालों की मेहनत और श्रद्धा साफ दिखाई देती है उन्होंने कुत्ते की मूर्तियों को स्थापित कर देवताओं को पूजने की यह नई और अलग परंपरा शुरू की है

ग्राम बघेरा की सरपंच निर्मला साहू ने इस मंदिर से जुड़ा एक विशेष ऐतिहासिक महत्व भी बताया उन्होंने बताया कि गांव के ही मालगुजार रामा नाम के व्यक्ति के दो कुत्ते थे मालगुजार जब अपने जमींदार के पास जाया करते थे तो उन कुत्तों को अपने पास लेकर जाते थे एक दिन मालगुजार राम बाहर गांव गए थे और अपने कुत्तों को बांध कर रखा था कुत्ते ने गाँव से लौट रहे मालगुजार को पहचान लिया और उन्हें छूने की कोशिश की कुत्तों ने इस काम के बाद खाना भी नहीं खाया जिसके कारण भूखे कुत्ते एक साथ भागकर तालाब में पानी पीकर मर गए

इन दो वफादार कुत्तों को अपने जीवन का अंतिम भाग खो दिया उनकी वफादारी और स्वामीभक्ति देखकर ग्राम मालगुजार रामा को उनके बिना अपने जीवन की सार्थकता नहीं मिली जब गांव में राम की समाधि स्थल तैयार हो गई तो वहीं पर ग्राम मालगुजार के दोनों कुत्ते के स्मारक बना दिए गए ग्राम के लोगों ने इन वफादार कुत्तों की याद में स्मारक बना दिए

गांव के मुखिया रामा के इस घटना के कुछ दिनों बाद एक संत गांव में आए और उन्होंने कहा कि गांव को कुछ हो रहा है इसकी सुरक्षा के लिए गाँव को एक कुत्ता मंदिर बनाना होगा मालगुजार रामा की याद में ग्राम बघेरा में मंदिर स्थापित करने की आवश्यकता को ग्रामीणों ने गंभीरता से लिया गाँव वालों ने एकजुट होकर एक विशेष समिति बनाई और गांव के लिए यह ऐतिहासिक मंदिर स्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से कुत्ता मंदिर बनाया इसमें वे नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करते हैं इसमें हर वर्ष रामनवमी में पूजा अर्चना की जाती है

 रामनवमी में कुत्ते का मेला लगता है जिसे कुकडौ रामनवमी भी कहते हैं ग्राम के लोग अपने घर में पकवान बनाकर आते हैं कुत्ते को खिलाते हैं ग्रामीण कुकडौ की तरह घूमते हैं इस दौरान इस क्षेत्र के कुएं और तालाब के पानी से ही गांव के पशु और कुत्ते को स्नान कराया जाता है कुएं के पानी से नहाकर गाय और बिल्ली कुत्ते सहित दूसरे पशुओं के लिए भी शुभ होता है यह मंदिर अब धीरे धीरे पर्यटकों के बीच एक दर्शनीय स्थल के रूप में लोकप्रिय हो गया है इस स्थान की धार्मिक महत्व और ग्रामीण की अटूट आस्था पर्यटकों को प्रभावित कर रही है

 

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