आयुर्वेद का अमृत, विज्ञान का ‘धीमा जहर’! तांबे के बर्तन में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, फायदे की जगह होगा जानलेवा नुकसान

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Cooking in copper vessels : सदियों से भारतीय रसोई की शान रहे तांबे के बर्तन आज एक बार फिर हेल्थ ट्रेंड बन चुके हैं। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान तक, हर कोई सुबह खाली पेट तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की सलाह देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस तांबे को पानी के लिए 'अमृत' माना जाता है, वही खाना पकाने या भोजन रखने के लिए 'धीमे जहर' का काम कर सकता है? अगर आप भी सेहतमंद रहने के चक्कर में यह गलती कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं।

क्यों पानी अमृत और खाना 'धीमा जहर'?

इस पहेली का जवाब विज्ञान में छिपा है। तांबा एक बहुत ही प्रतिक्रियाशील (Reactive) धातु है। जब पानी को इसमें 8-10 घंटे के लिए स्टोर किया जाता है, तो यह पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करके उसे शुद्ध कर देता है। पानी न्यूट्रल होता है, इसलिए उसके साथ तांबे की प्रतिक्रिया बहुत धीमी और फायदेमंद होती है।

लेकिन जैसे ही तांबे के बर्तन में कोई अम्लीय (Acidic) या नमकीन भोजन पकाया या रखा जाता है, तांबा भोजन के साथ तेजी से रासायनिक प्रतिक्रिया करने लगता है। इस प्रक्रिया में भोजन में जरूरत से ज्यादा कॉपर घुल जाता है, जिसे ‘कॉपर टॉक्सिसिटी’ (Copper Toxicity) कहते हैं। यह अतिरिक्त तांबा शरीर में जाकर धीरे-धीरे जहर का काम करता है।

इन चीजों से बना लें सख्त दूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ खास तरह के खाद्य पदार्थों को तांबे के संपर्क में लाना सीधे तौर पर बीमारियों को न्योता देना है:

  1. खट्टी चीजें: नींबू, सिरका, इमली, अचार, टमाटर की चटनी या कोई भी खट्टी सब्जी। इनकी एसिडिक प्रकृति तांबे के साथ मिलकर विषैले कंपाउंड बनाती है।
  2. डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही, पनीर या छाछ को भूलकर भी तांबे के बर्तन में न रखें। यह तुरंत रिएक्ट करके फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।
  3. नमक और मसालेदार भोजन: नमक तांबे के क्षरण (Oxidation) की प्रक्रिया को तेज कर देता है, जिससे धातु खाने में घुलने लगती है और उसका स्वाद भी बिगड़ जाता है।

सेहत पर हो सकते हैं ये गंभीर असर

लंबे समय तक तांबे के बर्तन में पकाया या रखा गया भोजन करने से शरीर में तांबे की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ सकती है, जिससे ये समस्याएं हो सकती हैं:

  • पाचन तंत्र की समस्याएं: उल्टी, दस्त, पेट में तेज दर्द और जी मिचलाना।
  • अंगों को नुकसान: लिवर और किडनी पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है और उनके फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य पर असर: शरीर में अतिरिक्त कॉपर मानसिक भ्रम और थकान का कारण भी बन सकता है।

कैसे करें तांबे के बर्तनों का सही इस्तेमाल?

इसका मतलब यह नहीं कि आप तांबे के बर्तनों को फेंक दें। बस उनका सही इस्तेमाल जानना जरूरी है:

  • सिर्फ पानी के लिए: तांबे के जग या लोटे का उपयोग केवल सादा पानी स्टोर करने के लिए करें।
  • 'कलई' है सुरक्षा कवच: अगर आप किसी पारंपरिक तांबे के बर्तन में खाना बनाना ही चाहते हैं, तो सुनिश्चित करें कि उसके अंदर ‘कलई’ (टिन की कोटिंग) ठीक से की हुई हो। यह परत भोजन और तांबे के बीच एक सुरक्षित दीवार का काम करती है।
  • नियमित सफाई: बर्तन पर जमने वाली हरी परत (कॉपर ऑक्साइड) को नींबू, इमली या नमक से रगड़कर हमेशा साफ रखें।

संक्षेप में, पानी के लिए तांबा एक वरदान है, लेकिन भोजन के लिए यह एक छिपा हुआ अभिशाप बन सकता है। समझदारी इसी में है कि पानी तांबे के बर्तन में पिएं और खाना स्टील या मिट्टी के बर्तन में पकाएं।