Ayodhya Ram Mandir : 500 सालों के इंतजार का शिखर पूरा आज आसमान में लहराया प्रभु राम का ध्वज, देखिए ऐतिहासिक पल
News India Live, Digital Desk : आज का दिन, यानी 25 नवंबर 2025, भारत के इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। अगर आप सनातनी हैं, तो आज का दिन आपके लिए किसी दीपावली से कम नहीं है।
साल 2024 में हमने प्रभु रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा देखी थी, और आज हमने उनके भव्य मंदिर को पूर्ण होते और उसके मुख्य शिखर पर धर्म ध्वज (Dhwaja) को लहराते हुए देखा है। आज अयोध्या का नज़ारा ऐसा था मानो त्रेतायुग वापस लौट आया हो।
आइए, बिल्कुल आसान शब्दों में जानते हैं कि आज अयोध्या में क्या-क्या हुआ और इस ध्वजारोहण का हमारे लिए क्या महत्व है।
161 फीट की ऊंचाई और गर्व से ऊंचा मस्तक
कल्पना कीजिये, 161 फीट ऊंचे मंदिर के शिखर पर जब नारंगी रंग का विशाल ध्वज हवा में लहराया, तो नीचे खड़े लाखों भक्तों के रोंगटे खड़े हो गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सुबह ही अयोध्या पहुंच गए थे। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच, पीएम मोदी ने अपने हाथों से राम मंदिर के मुख्य गुंबद पर ध्वज फहराया।
यह ध्वज सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं है, यह करोड़ों हिंदुओं के त्याग, बलिदान और 500 वर्षों के संघर्ष की जीत का निशान है।
कैसा है प्रभु राम का यह ध्वज?
आपके मन में सवाल होगा कि आखिर इस झंडे में ऐसा क्या खास है?
- प्रतीक: खबरों के अनुसार, इस ध्वज पर सूर्यवंशी भगवान राम का प्रतीक 'सूर्य' और कोविदस राम भक्त 'हनुमान' जी के चित्र अंकित हैं।
- स्तंभ: जिस दंड (डंडे) पर इसे लगाया गया है, वह विशेष अष्टधातु या सोने की परत से मढ़ा हुआ बताया जा रहा है, ताकि सालों-साल इसका तेज फीका न पड़े।
माहौल: हवा में सिर्फ 'राम' नाम की गूंज
अयोध्या आज दुल्हन की तरह सजी हुई है। जैसे ही ध्वज ऊपर गया, आसमान से हेलिकॉप्टर के जरिये फूलों की बारिश की गई। वहां मौजूद साधु-संतों की आंखों में खुशी के आंसू थे। पूरा परिसर "भए प्रकट कृपाला, दीन दयाला" और "जय श्री राम" के नारों से गूंज उठा।
यह वो पल था जिसका इंतज़ार हमारी कई पीढ़ियां कर रही थीं। शिखर का निर्माण पूरा होना और उस पर ध्वज का लगना, यह बताता है कि मंदिर अब पूर्णता की ओर है।
आम भक्तों के लिए क्या संदेश है?
दोस्तों, मंदिर के शिखर पर ध्वज लगने का मतलब होता है कि अब देव स्थान पूरी तरह से जागृत है और उसकी छत्रछाया दूर-दूर तक फैली है। शास्त्रों में कहा गया है कि 'शिखर दर्शनम पाप नाशम', यानी मंदिर के शिखर (और उस पर लगे ध्वज) के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है।
तो अगर आप अयोध्या जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अब आपको रामलला के दर्शन के साथ-साथ इस भव्य पताका के भी दर्शन होंगे जो गर्व से हवा में बात कर रही है।