Astrology Tips : साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, पैसों और रिश्तों पर पड़ सकता है भारी, इन 3 उपायों से करें अपना बचाव

Post

News India Live, Digital Desk: Astrology Tips : साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगने जा रहा है। यह ग्रहण धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण दिन यानी सर्व पितृ अमावस्या को लग रहा है। जब सूर्य पर ग्रहण का साया पड़ता है, तो इसका असर धरती के साथ-साथ हर व्यक्ति के जीवन पर भी होता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को मान-सम्मान, सफलता, पिता और आत्मा का कारक माना गया है। इसलिए, सूर्य ग्रहण को एक बड़ी खगोलीय घटना के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना भी माना जाता है।

हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। लेकिन ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि ग्रहण चाहे कहीं भी लगे, उसका सूक्ष्म प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है। कहा जा रहा है कि यह ग्रहण कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति और प्रेम संबंधों में उथल-पुथल मचा सकता है।

अगर आप भी ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ज्योतिष में कुछ ऐसे सरल उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप इन प्रभावों से अपना बचाव कर सकते हैं।

बचाव के लिए 3 सरल लेकिन अचूक उपाय

  1. करें पीली चीजों का दान
    सूर्य ग्रहण के बाद दान करने का विशेष महत्व है। कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने के लिए पीली चीजों का दान करना सबसे उत्तम माना जाता है। आप ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चने की दाल, गुड़, पीले वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार कोई भी पीली वस्तु दान कर सकते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से ग्रहण का दुष्प्रभाव कम होता है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।
  2. करें आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
    'आदित्य हृदय स्तोत्र' को सूर्य देव का सबसे प्रिय पाठ माना गया है। इसकी शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भगवान श्री राम ने भी रावण से युद्ध करने से पहले इसका पाठ किया था। सूर्य ग्रहण के बाद स्नान करके, साफ वस्त्र पहनकर इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ करें। यह पाठ न केवल ग्रहण के बुरे प्रभावों से आपकी रक्षा करेगा, बल्कि आपके जीवन में सफलता, प्रसिद्धि और आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा।
  3. जपें महामृत्युंजय मंत्र
    ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इस नकारात्मक ऊर्जा से खुद को बचाने के लिए महामृत्युंजय मंत्र एक अभेद्य कवच की तरह काम करता है। आप ग्रहण के दौरान या उसके बाद शांत मन से बैठकर "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥" मंत्र का जाप कर सकते हैं। यह मंत्र हर तरह के भय, रोग और संकट से रक्षा करता है।

ज्योतिष शास्त्र कहता है कि ये उपाय आपकी आस्था और विश्वास पर काम करते हैं। इन सरल उपायों को अपनाकर आप सूर्य ग्रहण के संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।