Astro Tips : क्या आपकी तुलसी भी सूख गई है? भूलकर भी न करें ये गलती, जानें तुलसी विसर्जन के 5 जरूरी नियम

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News India Live, Digital Desk: सूखी हुई तुलसी को घर में रखना उन्नति में बाधा और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इसे साधारण कूड़े या अनुपयुक्त स्थान पर फेंकना भारी पाप और मां लक्ष्मी के अपमान के समान है। शास्त्रों के अनुसार, तुलसी विसर्जन की एक निश्चित विधि है जिसे अपनाकर आप दोषों से बच सकते हैं।

तुलसी विसर्जन के मुख्य नियम (Tulsi Visarjan Rules)

दिन का चयन (Important Days): तुलसी के पौधे को कभी भी रविवार, एकादशी, द्वादशी या सूर्य/चंद्र ग्रहण के दिन नहीं छूना चाहिए और न ही विसर्जित करना चाहिए। विसर्जन के लिए गुरुवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि ये दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित हैं।

स्नान और शुद्धि: तुलसी के पौधे को हटाने से पहले स्वयं स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। विसर्जन से पहले पौधे के पास एक घी का दीपक जलाएं और अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।

जड़ सहित विसर्जन: सूखी हुई तुलसी को गमले से बहुत सावधानी से निकालें। ध्यान रहे कि इसकी जड़ें इधर-उधर न बिखरे। शास्त्रानुसार, तुलसी के समस्त भाग (जड़, तना, पत्तियां) पवित्र होते हैं।

जल विसर्जन या भू-विसर्जन: सबसे उत्तम विधि यह है कि सूखी तुलसी को किसी पवित्र नदी या बहते हुए शुद्ध जल में प्रवाहित कर दिया जाए। यदि आपके पास नदी नहीं है, तो आप गमले की मिट्टी में ही गहरा गड्ढा खोदकर उसे दबा सकते हैं ताकि वह खाद बन जाए और किसी का पैर उस पर न पड़े।

नया पौधा लगाने का समय: पुरानी तुलसी विसर्जित करने के तुरंत बाद उसी गमले में या नए गमले में नई तुलसी का पौधा लगाना चाहिए। घर का तुलसी का चबूतरा कभी भी खाली नहीं रहना चाहिए।

वास्तु और धार्मिक महत्व (Significance)

सूखी तुलसी बुध ग्रह की स्थिति खराब होने या घर पर आने वाली किसी बड़ी विपदा को सोखने का संकेत देती है। इसका सही विधि से विसर्जन करने से घर की सुख-शांति बनी रहती है और पितृ दोषों में भी कमी आती है।