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April 19 2026 06:14 am

अशोक खरात 'भोंदू बाबा' केस: 1500 करोड़ का साम्राज्य, 10 साल तक शोषण और रसूखदारों का 'कवच'; रोंगटे खड़े कर देगी नासिक के पाखंडी की कहानी

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नासिक का कथित आध्यात्मिक गुरु अशोक खरात, जो खुद को भविष्यवक्ता और तंत्र-मंत्र का ज्ञाता बताता था, आज सलाखों के पीछे है। लेकिन उसके काले कारनामों की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, समाज और सिस्टम दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यौन शोषण से लेकर 1500 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति तक, यह मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध की नहीं, बल्कि रसूख और अंधविश्वास के खतरनाक गठजोड़ की कहानी है।

शोषण की पराकाष्ठा: 10 साल का नरक और जबरन गर्भपात

अशोक खरात के खिलाफ दर्ज पहली एफआईआर ने एक ऐसी दास्तां बयां की जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। पीड़ित महिला के अनुसार:

लगातार दुष्कर्म: खरात पिछले 10 वर्षों से डरा-धमकाकर महिला का शारीरिक शोषण कर रहा था।

अमानवीय कृत्य: शोषण के दौरान महिला गर्भवती हो गई। बदनामी के डर से आरोपी ने उसे गर्भपात की दवा खिलाकर जबरन उसका अबॉर्शन करवा दिया।

भय का माहौल: महिलाएं इतने वर्षों तक इसलिए चुप रहीं क्योंकि खरात ने अपने राजनीतिक रसूख का ऐसा जाल बुना था कि पीड़ितों को पुलिस के पास जाने की हिम्मत ही नहीं होती थी।

रसूख और विवाद: रूपाली चाकणकर का नाम आने से मचा हड़कंप

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब महाराष्ट्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की तस्वीरें खरात के साथ वायरल हुईं।

विवादास्पद भूमिका: तस्वीरों में चाकणकर कभी बाबा के पैर धोती तो कभी उनके लिए छतरी पकड़े नजर आ रही हैं।

ट्रस्ट कनेक्शन: वह खरात के 'शिवनिका ट्रस्ट' के बोर्ड में भी शामिल थीं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

पत्रकार को धमकी: एक स्थानीय पत्रकार ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने खरात के खिलाफ खबर लिखी, तो चाकणकर ने फोन कर उन पर दबाव बनाया और आरोपी का बचाव किया।

ठगी से खड़ा किया 1500 करोड़ का 'लग्जरी' साम्राज्य

भविष्य बताने और समस्याओं के समाधान के नाम पर खरात ने लोगों की मजबूरी का सौदा किया। आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभर के अनुसार, खरात की संपत्ति 1500 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है।

आलीशान फार्महाउस: सिन्नर तालुका में 12 एकड़ में फैला उसका फार्महाउस किसी राजमहल से कम नहीं है। यहाँ इजरायल और तुर्की से मंगाया गया महंगा फर्नीचर और विदेशी सुविधाएं मौजूद हैं।

ट्रस्ट और मंदिर: ठगी के पैसों से उसने शिवनिका ट्रस्ट बनाया और भगवान शंकर का मंदिर बनवाया, ताकि अपनी छवि एक 'पुण्यात्मा' के रूप में पेश कर सके।

बेनामी खाते: जांच में यह भी सामने आया है कि खरात के बैंक खाते कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के परिजनों के नाम पर संचालित हो रहे थे।

भक्तों के अनुभव: बाल-बाल बचे लोग

नासिक के ही रामकृष्ण मदाने जैसे कई लोग अब सामने आ रहे हैं जो खरात के चंगुल में फंसते-फंसते बचे। मदाने अपनी पत्नी के साथ संतान प्राप्ति की कामना लेकर गए थे, लेकिन खरात के व्यवहार और 'अकेले में मिलने' की जिद ने उन्हें संदेह में डाल दिया। आज वे खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्होंने दोबारा वहां कदम नहीं रखा।

निष्कर्ष: अशोक खरात का मामला यह याद दिलाता है कि कैसे रसूख और रक्षक की भूमिका निभाने वाले लोग जब भक्षक बन जाएं, तो न्याय की राह कितनी कठिन हो जाती है। यह केस केवल कानूनी कार्रवाई का नहीं, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता का भी है।