तुलसी को जल देते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? जानिए वो नियम जो घर में लाते हैं सुख समृद्धि
News India Live, Digital Desk : हम में से शायद ही कोई ऐसा होगा जिसके घर के आंगन या बालकनी में तुलसी का पौधा न हो। हमारे हिन्दू धर्म में तुलसी सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि साक्षात् माँ लक्ष्मी का रूप मानी जाती हैं। कहते हैं जिस घर में हरी-भरी तुलसी होती है, वहां संकट फटकता भी नहीं है। हम सब बड़े प्रेम और श्रद्धा से रोज सुबह उठकर तुलसी माँ को जल चढ़ाते हैं, धूप-दीप दिखाते हैं।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हमारी यह भक्ति कभी-कभी अनजाने में हमें नुकसान भी पहुंचा सकती है? जी हाँ, शास्त्रों में तुलसी पूजा के कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिन्हें अक्सर हम जानकारी के अभाव में नजरअंदाज कर देते हैं। आइए, बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि तुलसी में जल कब चढ़ाना चाहिए और कब रुक जाना चाहिए।
रविवार (Sunday) को न चढ़ाएं जल
अक्सर लोग आदत के अनुसार रविवार की छुट्टी वाले दिन भी सुबह-सुबह नहाकर तुलसी में लोटा भर जल चढ़ा देते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह सही नहीं माना जाता। मान्यताओं की मानें तो रविवार के दिन तुलसी माता विश्राम करती हैं। इस दिन उन्हें जल चढ़ाने या उनके पत्ते तोड़ने से वे रुष्ट हो सकती हैं। इसे एक तरह से उनके आराम में खलल डालना माना जाता है।
एकादशी (Ekadashi) का रखें खास ख्याल
यह नियम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और कई लोग इसे नहीं जानते। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, और तुलसी जी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय हैं। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए 'निर्जला व्रत' (बिना पानी के व्रत) रखती हैं।
जरा सोचिए, अगर किसी का व्रत हो और आप उसे जबरदस्ती पानी पिला दें, तो क्या उसका व्रत नहीं टूट जाएगा? ठीक वैसे ही, एकादशी पर जल चढ़ाने से तुलसी माता का व्रत खंडित हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि ऐसा करने से घर में आर्थिक तंगी आ सकती है और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।
तो फिर सही तरीका क्या है?
तुलसी पूजन से पूरा लाभ मिले, इसके लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें:
- रविवार और एकादशी को छोड़कर नियमित रूप से जल चढ़ाएं।
- सूर्यास्त के बाद यानी शाम को तुलसी में जल न दें, सिर्फ दीपक जलाएं।
- तुलसी का पौधा अगर सूख जाए, तो उसे तुरंत हटाकर नया पौधा लगाएं, क्योंकि घर में सूखा हुआ तुलसी का पौधा रखना शुभ नहीं माना जाता।