शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की तैयारी? 20 साल के अनुभवी टीचरों को TET से मिल सकती है छूट
News India Live, Digital Desk: भारत में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य योग्यता मानी जाने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET/CTET) को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। बीजेपी सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जो शिक्षक पिछले 20 वर्षों से लगातार अध्यापन कार्य कर रहे हैं, उन्हें अब TET की अनिवार्य परीक्षा से मुक्त कर देना चाहिए। इस मांग ने उन हजारों शिक्षकों के चेहरे पर खुशी ला दी है जो दशकों से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं लेकिन कानूनी पेचों में फंसे हुए हैं।
सांसद की दलील: 'अनुभव ही सबसे बड़ी परीक्षा' (Experience vs TET)
सांसद का तर्क है कि जो शिक्षक 20 साल से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उनके पास अनुभव की वह पूंजी है जो किसी भी लिखित परीक्षा से बड़ी है।
तनाव से मुक्ति: इस उम्र में शिक्षकों के लिए दोबारा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना मानसिक और पारिवारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।
अनुभव का सम्मान: 20 साल का सेवाकाल अपने आप में उनकी योग्यता का प्रमाण है।
शिक्षकों की कमी: इस छूट से कई अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं सुचारू रूप से जारी रह सकेंगी, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं होगी।
नियमों का पेच और वर्तमान स्थिति
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य है।
पुराने शिक्षकों की समस्या: कई शिक्षक ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति RTE एक्ट लागू होने से पहले की है, लेकिन नियमों में बदलाव के कारण उनकी नौकरी पर तलवार लटकी रहती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: अदालतों ने समय-समय पर TET को अनिवार्य बताया है, जिसके कारण राज्य सरकारें दबाव में रहती हैं।
शिक्षकों की मांग: शिक्षक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि 'इन-सर्विस' (कार्यरत) शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट दी जाए।
क्या होगा इसका असर?
अगर सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो देश भर के लाखों प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को सीधा लाभ होगा। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए