ऐप्स के लिए ऐपल लाया ग्लोबल एज वेरिफिकेशन टूल अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा होगी और भी पुख्ता, जानें कैसे करेगा काम
News India Live, Digital Desk: दिग्गज टेक कंपनी ऐप्पल (Apple) ने इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। ऐप्पल ने वैश्विक स्तर पर डेवलपर्स के लिए नए 'एज वेरिफिकेशन टूल्स' (Age Verification Tools) पेश किए हैं। यह फीचर विशेष रूप से उन ऐप्स के लिए अनिवार्य किया जा रहा है जो संवेदनशील कंटेंट परोसते हैं।
इस नए अपडेट के बाद अब ऐप स्टोर पर मौजूद ऐप्स के लिए यूजर्स की उम्र की पहचान करना न केवल आसान होगा, बल्कि यह काफी सुरक्षित भी होगा।
क्या है ऐप्पल का नया एज वेरिफिकेशन टूल?
यह टूल डेवलपर्स को एक ऐसा सिस्टम प्रदान करता है जिसके जरिए वे बिना यूजर की निजी जानकारी (जैसे आधार कार्ड या जन्म तिथि) साझा किए यह जान सकेंगे कि यूजर उस ऐप के लिए निर्धारित आयु सीमा को पार करता है या नहीं।
यह कैसे काम करेगा?
Privacy-Preserving Tech: ऐप्पल का यह सिस्टम 'जीरो-नॉलेज प्रूफ' जैसी तकनीक पर आधारित है। यह केवल "हाँ" या "नहीं" में जवाब देगा कि यूजर वयस्क है या नहीं।
Apple ID का इस्तेमाल: यह टूल यूजर के Apple ID में पहले से मौजूद जन्म तिथि का उपयोग करेगा, जिसे यूजर ने डिवाइस सेटअप करते समय दर्ज किया था।
थर्ड-पार्टी शेयरिंग पर रोक: ऐप डेवलपर्स को यूजर की वास्तविक जन्म तिथि नहीं दिखेगी, जिससे डेटा लीक होने का खतरा खत्म हो जाता है।
यूजर्स और पेरेंट्स के लिए इसके फायदे
पेरेंटल कंट्रोल: अब माता-पिता को इस बात की चिंता कम होगी कि उनके बच्चे अनजाने में किसी 18+ या संवेदनशील ऐप को एक्सेस कर रहे हैं।
सुरक्षित गेमिंग: ऑनलाइन गेम्स में अक्सर आयु सत्यापन (Age Verification) की कमी होती है, जिसे अब यह टूल काफी हद तक सुलझा देगा।
डेटा प्राइवेसी: आपको हर नए ऐप पर अपनी उम्र साबित करने के लिए आईडी कार्ड अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी।
डेवलपर्स के लिए क्या बदलेगा?
ऐप्पल ने साफ किया है कि जो ऐप्स सोशल मीडिया, डेटिंग, या गेमिंग से संबंधित हैं, उन्हें आने वाले महीनों में इस टूल को अपने सिस्टम में इंटीग्रेट करना होगा। यदि कोई डेवलपर नियमों का उल्लंघन करता है या फर्जी आयु सत्यापन का सहारा लेता है, तो उसका ऐप स्टोर से हटाया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐप्पल का यह कदम डिजिटल जगत में 'ऑनलाइन सेफ्टी' के लिए एक नया मानक तय करेगा। यह टूल विशेष रूप से यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के कड़े ऑनलाइन सुरक्षा कानूनों (जैसे UK का Online Safety Act) के अनुरूप तैयार किया गया है।