अनुभव सिन्हा ने बॉलीवुड की दुखती रग पर रखा हाथ; बताया क्यों फिल्मों से कट गया दर्शकों का मोह

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News India Live, Digital Desk: आर्टिकल 15' और 'थप्पड़' जैसी गंभीर फिल्में देने वाले दिग्गज निर्देशक अनुभव सिन्हा ने बॉलीवुड की वर्तमान स्थिति पर एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जो सीधे आम दर्शकों के दिल से जुड़ी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के 'संकट' पर बात करते हुए कड़वा सच बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बॉलीवुड की फिल्मों से वह 'मिट्टी की खुशबू' और 'अपनी कहानी' क्यों गायब हो गई है, जिसे देखकर कभी दर्शक सिनेमाघरों की ओर खिंचे चले आते थे।

अनुभव सिन्हा का तीखा सवाल: "हम किसे खुश करने के लिए फिल्में बना रहे हैं?"

अनुभव सिन्हा का मानना है कि बॉलीवुड इस समय एक पहचान के संकट (Identity Crisis) से गुजर रहा है। उन्होंने दर्शकों की निराशा के पीछे के मुख्य कारणों को उजागर किया है:

जड़ से कटती कहानियां: सिन्हा के अनुसार, आज की फिल्में अक्सर पश्चिमी चमक-धमक या बड़े बजट के एक्शन से प्रभावित होती हैं, जिनमें भारतीय समाज की वास्तविक संवेदनाएं और मध्यम वर्ग की कहानियां (Middle-class stories) कहीं खो गई हैं।

कनेक्ट की कमी: उन्होंने पूछा, "हमारी कहानी कहां है?" यानी ऐसी कहानियां जिन्हें देखकर आम आदमी कह सके कि 'यह तो मेरी बात हो रही है'। जब तक फिल्में दर्शकों के जीवन को नहीं छुएंगी, वे सिनेमाघरों तक नहीं आएंगे।

सिर्फ नंबर्स का खेल: फिल्म जगत अब कहानी से ज्यादा ओपनिंग डे कलेक्शन और 100-200 करोड़ के क्लब पर ध्यान दे रहा है, जिससे रचनात्मकता (Creativity) पीछे छूट गई है।

क्यों 'रूठ' गया है दर्शक?

इंटरव्यू के दौरान सिन्हा ने यह भी संकेत दिया कि ओटीटी (OTT) के आने के बाद दर्शकों का स्वाद बदल गया है। अब वे केवल बड़े स्टार्स को देखने के लिए टिकट नहीं खरीदते, बल्कि उन्हें 'कंटेंट' में दम चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि बॉलीवुड को आत्ममंथन (Introspection) करने की जरूरत है कि वह अपनी जड़ों से क्यों दूर होता जा रहा है।

साउथ और रीजनल सिनेमा से सीख

अनुभव सिन्हा के इस बयान को हाल के वर्षों में साउथ की फिल्मों (जैसे कांतारा, पुष्पा) की सफलता से जोड़कर देखा जा रहा है। इन फिल्मों ने साबित किया है कि अगर कहानी 'लोकल' और जड़ों से जुड़ी हो, तो वह 'ग्लोबल' हिट हो सकती है। सिन्हा का इशारा साफ है—बॉलीवुड को वापस अपने लोगों के बीच जाना होगा।

इंडस्ट्री में हलचल

अनुभव सिन्हा के इस बयान ने सोशल मीडिया और फिल्म जगत में एक नई चर्चा शुरू कर दी है। कई फिल्म समीक्षकों का मानना है कि यह बॉलीवुड के लिए 'वेक-अप कॉल' है। यदि मेकर्स ने अब भी अपनी कहानी कहने के अंदाज को नहीं बदला, तो दर्शकों की यह दूरी और बढ़ सकती है।