उत्तर प्रदेश में बिछेगी एक और नई रेलवे लाइन, इन 7 जगहों पर बनेंगे नए स्टेशन, 10 लाख लोगों का सफर होगा आसान
उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई रफ्तार देने के लिए, योगी सरकार अब प्रदेश के रेलवे नेटवर्क को और भी मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में, प्रदेश के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। घुघली-आनंदनगर रेल लाइन परियोजना के तहत महाराजगंज में 52 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन बिछाने की तैयारी तेज हो गई है, जिस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
यह प्रोजेक्ट न सिर्फ ट्रैफिक की समस्या को कम करेगा, बल्कि कई छोटे कस्बों और गांवों को विकास की मुख्य धारा से भी जोड़ेगा। इस लाइन के बनने से क्षेत्र की लगभग 10 लाख की आबादी को सीधा फायदा पहुंचने का अनुमान है।
ये होंगे 7 नए स्टेशन
इस 52 किलोमीटर के सफर को आसान बनाने के लिए रास्ते में 7 नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। इन स्टेशनों की सूची में शामिल हैं:
- आनंदनगर
- महाराजगंज
- परसिया बुजुर्ग
- शिकारपुर
- नोनिया
- पिपरा मुंडेरी हॉल्ट
(नोट: सूची में फिलहाल 6 स्टेशनों के नाम दिए गए हैं, एक अन्य हॉल्ट स्टेशन का निर्माण भी प्रस्तावित है।)
सिर्फ स्टेशन ही नहीं, 32 अंडरपास भी बनेंगे
यह प्रोजेक्ट सिर्फ ट्रैक बिछाने तक ही सीमित नहीं है। लोगों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस नई रेलवे लाइन पर 32 अंडरपास का भी निर्माण किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों और वाहनों को रेलवे लाइन पार करने में कोई परेशानी न हो। माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के भी कई नए अवसर पैदा होंगे।
कब तक पूरा होगा काम?
इस बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए कुल 53 गांवों की जमीन ली जाएगी, जिनमें से 29 गांवों में जमीन अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे ने उन किसानों से अपनी फसलें काट लेने की अपील की है, जिनकी जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। जल्द ही इन जमीनों पर नोटिस बोर्ड लगाने और ग्राम पंचायत स्तर पर मुनादी (घोषणा) कराने का काम भी शुरू किया जाएगा।
- कब मिली मंजूरी: इस प्रोजेक्ट को साल 2023 में मंजूरी दी गई थी।
- कितना है बजट: इसे बनाने के लिए ₹958.27 करोड़ का बजट तय किया गया है।
- कब तक होगा पूरा: रेलवे ने इस पूरी परियोजना को साल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस नई रेलवे लाइन और स्टेशनों के बनने से न सिर्फ शहरों तक उनकी पहुंच आसान होगी, बल्कि उनके क्षेत्र में व्यापार और विकास को भी नए पंख लगेंगे, जिससे छोटे शहर सीधे बड़े महानगरों से जुड़ सकेंगे।