Anant Kaal Sarp Dosh : शादी से लेकर सेहत तक सब बर्बाद कर देता है यह खतरनाक दोष, कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं?
News India Live, Digital Desk: ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के दोषों की जब भी बात होती है, तो "कालसर्प दोष" का नाम सुनकर ही मन में एक डर सा बैठ जाता है. यह एक ऐसा दोष है जिसके बारे में कहा जाता है कि अगर यह किसी की कुंडली में हो, तो उसे जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है. कालसर्प दोष भी 12 तरह के होते हैं और हर एक का असर अलग होता है. इन्हीं में से एक है 'अनंत कालसर्प दोष', जिसे सबसे खतरनाक माना जाता है.
कैसे बनता है अनंत कालसर्प दोष?
यह दोष तब बनता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु पहले घर (लग्न) में बैठ जाए और केतु ठीक सातवें घर में हो. साथ ही, बाकी के सारे सात ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) इन दोनों ग्रहों के बीच में एक तरफ आ जाएं. ज्योतिष में पहला घर व्यक्ति के शरीर और व्यक्तित्व का होता है, जबकि सातवां घर शादी और पार्टनरशिप का. जब इन दोनों महत्वपूर्ण घरों को राहु-केतु घेर लेते हैं, तो जीवन में परेशानियां शुरू हो जाती हैं.
क्या असर होता है इस दोष का?
- शादी में दिक्कतें: अनंत कालसर्प दोष का सबसे बुरा असर वैवाहिक जीवन पर पड़ता है. ऐसे लोगों की या तो शादी होने में बहुत मुश्किलें आती हैं, या फिर शादी के बाद भी पति-पत्नी के बीच हमेशा तनाव, लड़ाई-झगड़े बने रहते हैं. बात तलाक तक पहुंच जाती है.
- सेहत की समस्याएं: जिस व्यक्ति की कुंडली में यह दोष होता है, उसे अक्सर सेहत से जुड़ी परेशानियां लगी रहती हैं. दिमागी तनाव, चिंता और कोई न कोई बीमारी बनी ही रहती है.
- काम में रुकावट: ऐसे लोग मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन उन्हें उसका फल नहीं मिलता. हर काम में रुकावटें आती हैं और सफलता हाथ लगते-लगते रह जाती है.
- समाज से दूरी: इस दोष के कारण व्यक्ति का स्वभाव थोड़ा अलग-थलग हो जाता है, जिससे उसके सामाजिक रिश्ते भी खराब होने लगते हैं.
इस दोष से बचने के क्या उपाय हैं?
ज्योतिष शास्त्र में इस दोष के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए कुछ सरल उपाय भी बताए गए हैं:
- शिव जी की पूजा: भगवान शिव को काल का देवता माना जाता है. इसलिए, नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाना और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना इस दोष के प्रभाव को कम करता है.
- नाग पंचमी की पूजा: नाग पंचमी के दिन नाग-नागिन के चांदी के जोड़े की पूजा करके उन्हें नदी में प्रवाहित करना बहुत असरदार उपाय माना जाता है.
- राहु-केतु के मंत्र: राहु और केतु के मंत्रों का नियमित जाप करना चाहिए. आप किसी पंडित की मदद से इनकी शांति के लिए पूजा भी करवा सकते हैं.
- हनुमान चालीसा का पाठ: हर मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी राहु-केतु के बुरे असर से राहत मिलती है.
- पवित्र नदियों में स्नान: समय-समय पर गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना भी इस दोष के प्रभाव को कम करने में मदद करता है.
अगर आपको लगता है कि आपकी कुंडली में भी यह दोष हो सकता है, तो किसी अच्छे ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है.